Palamu

पलामू में औसत से बहुत कम बारिश, सुखाड़ जैसे हालात पर राधाकृष्‍ण किशोर ने जतायी चिंता

Daltonganj: अनावृष्टि के कारण पलामू जिले की स्थिति गंभीर है. जिले में सुखाड़ ने दस्तक दे दी है. खरीफ के मौसम में औसत से कम वर्षा होने के कारण जिले के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखायी दे रही हैं. इस समस्‍या को सत्तारूढ़ भाजपा के मुख्य सचेतक एवं छत्तरपुर के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने चिंता व्‍यक्‍त की है.

कई दशक से पड़ रहा सूखा, नहीं सुधरी सिंचाई व्‍यवस्‍था

राधाकृष्‍ण किशोर ने मेदिनीनगर स्थित आवास में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले तीन दशकों में पलामू में कई बार सुखाड़ का दंश झेल चुका है. इससे यहां किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है. इस बार खरीफ के मौसम में अल्पवृष्टि के कारण किसानों के मन में कई शंकाओं का उत्पन्न होना स्वभाविक है.

उन्‍होंने बहुत साफगोई से कहा कि पलामू जिले में लचर सिंचाई व्यवस्था के कारण निर्मित सिंचाई योजनाओं की क्षमता पहले से ही कम है. जिले के अधिकांश चेकडैम रखरखाव के अभाव में कारगर नहीं हैं. कम वर्षा के कारण जलाशय, बियर, आहर, तालाब, डोभा आदि में निर्धारित मापदंड के अनुपात में बहुत ही कम वर्षाजल का संग्रहण हो पाया है.

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कम बारिश का खेती पर दुष्‍प्रभाव

कम वर्षा का कुप्रभाव धान, मक्का, दलहन और तेलहन आदि की खेती पर सीधा पड़ा है. अल्पवृष्टि के कारण भू-गर्भीय जल, स्वस्थ्य जीवन स्तर और पर्यावरण पर भी पड़ने का प्रबल आशंका है.

राधाकृष्‍ण किशोर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस साल 51,000 हेक्टेयर में धान, 27,520 हेक्टेयर में मक्का, 51,800 हेक्टेयर में दलहन और 2390 हेक्‍टेयर में तेलहन की खेती का लक्ष्य निर्धारित है. जबकि 20 अगस्त 2018 तक 27,764 हेक्‍टेयर में धान, 25,427 हेक्‍टेयर में मक्का, 31,447 हेक्‍टेयर में दलहन तथा 1224 हेक्‍टेयर में तेलहन फसलों का आच्छादन हो पाया है.

उन्होंने कहा कि धान और मक्का पलामू की मुख्य फसलें हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 15 अगस्त तक धान की रोपायी हो जाने से अच्छे उत्पादन की संभावना बनी रहती है, लेकिन कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक मात्र 54.64 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो सकी है. यह घोर चिंता का विषय है. पलामू जिले में धान, मक्का, दलहन, तेलहन की अच्छी खेती के लिए जून, जुलाई और अगस्त माह तक 885 मिमी वर्षा का होना आवश्यक है. जबकि जून से लेकर 20 अगस्त तक मात्र 395 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है.

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सामान्‍य से बहुत कम हुई बारिश

उन्होंने बताया कि जून में सामान्य वर्षा 152.4 मिमी के मुकाबले सिर्फ 57.93 मिमी वर्षा हुई. यह कुल 38.1 प्रतिशत है. जुलाई में 344.7 मि.मी. सामान्य वर्षा के विरूद्ध में 255.40 मिमी वर्षापात यानि 74.09 प्रतिशत हुई. 20 अगस्त तक 388.1 मिमी के विरूद्ध मात्र 82.07 मिमी बारिश हुई, जो 21.15 प्रतिशत है. यानि 20 अगस्त तक सामान्य वर्षापात 885.2 मिमी के विरूद्ध 395.4 मिमी बारिश हुई, जो कि कुल का 44.67 प्रतिशत है.

इन प्रखंडों में है भयावह स्थिति

राधाकृष्‍ण किशोर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कम वर्षा के कारण छत्तरपुर, नौडीहा बाजार, पांडू, नावाबाजार, विश्रामपुर और पंड़वा प्रखंडों की स्थिति बहुत भयावह बन गई है. इन प्रखंडों में 50 प्रतिशत से भी कम धान की रोपनी हुई है. बारिश की कमी का कुप्रभाव अब मक्का की फसल पर भी देखा जा सकता है.

जरूरत वैकल्पिक खेती की, अभी तक बीज नहीं

राधाकृष्‍ण किशोर ने बताया कि पलामू में सूखे की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग को कुर्थी, सरगुजा, राजमा, तोरी इत्यादि वैकल्पिक फसलों के उत्पादन की व्यवस्था पर बल देने की आवश्यकता है. इन फसलों की खेती के लिए करीब 1200 क्विंटल बीज की जरूरत है, लेकिन कृषि विभाग के पास अभी तक बीज की कोई उपलब्धता नहीं है. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार के मुखिया रघुवर दास बहुत संवेदनशील व्यक्ति हैं और मैं व्यक्तिगत तौर पर उनसे मिल कर जिले की इस स्थिति से अवगत कराने और समस्या का समाधान कराने के लिए  प्रयासरत हूं.

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उन्होंने पलामू के उपायुक्त से भी अनुरोध किया कि वह अपने स्तर से इस आपदा की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए सक्रियता दिखायें.

फसल बीमा पर ध्‍यान दे सरकार

राधाकृष्‍ण किशोर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल जिले के 1.50 लाख किसानों का कृषि बीमा करने का लक्ष्य निर्धारित है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक 85 हजार किसान अपनी कृषि का बीमा करा चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कई किसानों की शिकायत है कि उनको वर्ष 2016-17 के फसल बीमा का भुगतान नहीं हो पाया है. सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए. प्रेसवार्ता में युवा नेता प्रशांत किशोर, बालक मेहता, रामजन्म सिंह और अजय कुमार सिंह शामिल थे.

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