
NewDelhi : पुलवामा हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गयी थी. बता दें कि याचिका में पुलवामा और उरी हमलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में जांच आयोग के गठन की मांग की गयी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसमें दखल देने से इनकार कर दिया है. बता दें कि कोर्ट हमलों की जांच या निगरानी नहीं करेगा. याचिका में कहा गया था कि सेना, खुफिया विभाग और स्थानीय प्रशासन की मदद से उरी और पुलवामा की घटना के पीछे और पाकिस्तानी आंतकियों की मदद करने वाले भारतीय नागरिकों की भूमिका की जांच की जाये. याचिका में यह भी कहा गया था कि केंद्र सरकार कोर्ट में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं के खिलाफ की गयी कार्रवाई के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जो सक्रिय रूप से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं.
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और उसके नेताओं से संबंधित सभी खातों को सीज करने की मांग की गयी थी. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं को दी गयी सुरक्षा तत्काल प्रभाव से वापस लेने, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और अन्य राष्ट्र-विरोधी दलों को लोकसभा चुनाव और अन्य चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग भी की गयी थी.
राष्ट्रविरोधी, सशस्त्र बल विरोधी, शहीदों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को अपराध घोषित किया जाये
वकील विनीत ढांडा द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर देश के खिलाफ राष्ट्रविरोधी, सशस्त्र बल -विरोधी, शहीदों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को अपराध घोषित किया जाये. पुलवामा हमले के शहीदों के परिवारों के लिए भेजे जा रहे धन के बारे में जानकारी दी जाये, ताकि पैसा शहीदों के परिवारों तक ही पहुंचे. राष्ट्रीय जांच एजेंसी को उन सभी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिये जायें, जिनके खिलाफ ठोस सबूत उपलब्ध हैं. जम्मू और कश्मीर राज्य में उन स्थानीय लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाये, जो किसी भी रूप में सशस्त्र बलों पर हमला करते हैं.
पाकिस्तान के साथ सभी सांस्कृतिक संबंधों पर प्रतिबंध लगाने की मांग
उन सभी धार्मिक और राजनीतिक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गयी थी, जो जम्मू और कश्मीर राज्य में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं. भारत और जम्मू-कश्मीर राज्य के स्थानीय युवाओं के साथ राज्य भर में विभिन्न कल्याणकारी और बातचीत कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे संवाद में शामिल होने के लिए निर्देश देने की भी बात कही गयी है. इसके अलावा पाकिस्तान के साथ सभी सांस्कृतिक संबंधों पर प्रतिबंध लगाने और उनके कलाकारों, अभिनेताओं, संगीतकारों और खिलाड़ियों को भारत में प्रवेश करने और प्रदर्शन करने से प्रतिबंधित करने की मांग की गयी है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में दखल देने से इनकार कर दिया .




