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पल्स हॉस्पिटल प्रकरण: मौखिक ही बनी टीम और हो गयी जांच, कहां से मिलेगी रिपोर्ट

Ranchi : पिछले एक सप्ताह से पल्स हॉस्पिटल से जुड़ी जांच रिपोर्ट को ढूंढने में अधिकारी और कर्मचारी परेशान हैं. एसी समेत कार्यालय के कई कर्मचारी जांच रिपोर्ट की तलाश में जुटे हुए हैं. जो नहीं मिलने वाली. क्यूंकि इस मामले में कोई जांच ही नहीं हुई, तो रिपोर्ट कहाँ से मिलेगा. सारा कुछ मौखिक तौर पर ही हो गया. जांच भी हो गयी, रिपोर्ट भी हो गयी, इसका कोई लिखित प्रमाण है ही नहीं. इधर, एसी कार्यालय से लगातार तत्कालीन अपर समाहर्ता और तत्कालीन सीओ को पत्र लिख कर रिपोर्ट की मांग की जा रही है. रिपोर्ट होंगी तभी तो रिपोर्ट मिलेगी.

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तत्कालीन डीसी ने ऑफिशियली कोई जांच टीम नहीं बनायी थी

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जानकारी के मुताबिक इस पूरे मामले में तत्कालीन डीसी राय महिमापत रे की ओर से ऑफिशियली कोई जांच टीम बनाई ही नहीं गई थी. अपर समाहर्ता को मौखिक तौर पर ही जांच का निर्देश दिया गया था. अचानक पूजा सिंघल प्रकरण के बाद पल्स हॉस्पिटल की जांच से संबंधित रिपोर्ट की तलाश तेज हो गई है.

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13 फरवरी को मुख्यमंत्री ने दिया था जांच का आदेश

भुईंहरी जमीन पर अस्पताल बनाए जाने की शिकायत नारायण विश्वकर्मा नाम व्यक्ति ने फरवरी 2020 में की थी. जिसके बाद हेमंत सोरेन ने 13 फरवरी 2020 को डीसी रांची को निर्देश देते हुए कहा था कि आरोपियों पर कार्रवाई कर सूचित करें. अब कहा जा रहा है कि इसके बाद तत्कालीन डीसी राय महिमापत रे ने तत्कालीन अपर समाहर्ता सत्येंद्र कुमार और बड़गाईं सीओ की दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई थी. लेकिन जांच रिपोर्ट गायब है. ईडी ने छापेमारी के बाद अस्पताल से संबंधित रिपोर्ट जिला प्रशासन से मांगी है. जिसको लेकर डीसी ने अपर समाहर्ता को पत्र मिलने के बाद 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी.

रद्द हो चुका है म्युटेशन अपील

भुईंहरी नेचर की जमीन पर ही पल्स हॉस्पिटल का निर्माण हुआ है. जानकारी के अनुसार जमीन के म्युटेशन के लिए बड़गाईं अंचल में आवेदन किया गया था. मगर तत्कालीन सीओ विनोद प्रजापति ने उसे रिजेक्ट कर दिया. रिजेक्ट करने के कारण में उन्होंने स्पष्ट किया था कि राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक की ओर से प्रतिवेदित किया गया है कि म्युटेशन के लिए आवेदित भूमि सर्व खतियान के अनुसार ऑनलाइन बकास्त भुईंहरी दर्ज है. जो सरकार के निहित नहीं है. अत: प्रतिवेदन के आधार पर नामांतरण अस्वीकृत किया जाता है. विनोद प्रजापति के ट्रांसफर होने के बाद शैलेश कुमार को बड़गाईं सीओ बनाया गया. इस मामले को शैलेश के पास भी लाया गया, लेकिन उन्होंने भी म्युटेशन करने से साफ इंकार कर दिया था.

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