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बिजली की समस्या से परेशान जनता, छह-सात घंटे हो रही बिजली कटौती

  • डीवीसी कमांड एरिया में 6 नवंबर से जारी है कटौती
  • राजधानी में उपलब्धता में 20 मेगावाट तक की कमी

Ranchi : बिजली की आंख मिचौली से जनता परेशान है. अलग-अलग इलाकों में छह-सात घंटे तक बिजली कटौती जारी है. सुदूर ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो और भी खराब है. राज्य में पिछले कुछ दिनों में 180 मेगावाट तक की बिजली कटौती हुई. जिसकी प्रमुख वजह राज्य में मिलनेवाली बिजली में कमी है. सेंट्रल पूल से बिजली की कमी और राज्य स्रोतों से बिजली उत्पादन में कमी इसकी प्रमुख वजह है. राज्य को सेंट्रल पूल से मिलनेवाली बिजली में 80 मेगावाट तक की कमी है. वहीं, पानी की कमी से सिकिदरी हाइडल प्लांट बंद कर दिया गया है.

प्लांट एरिया में 25 फीट नीचे पानी का स्तर चला गया है. वहीं, टीवीयूएनएल के दोनों यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू है. डीवीसी कमांड एरिया में 6 नवंबर से 50 फीसदी बिजली कटौती जारी है.

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राजधानी की स्थिति खराब

राजधानी रांची के अलग-अलग इलाकों भी बिजली की कमी झेल रहे हैं. इसमें कोकर, बरियातू, नामकुम, कांके, हटिया, रातू रोड, हरमू, मोरहाबादी आदि इलाके शामिल हैं. जेबीवीएनएल एरिया बोर्ड की मानें तो पिछले दिनों रांची के अलग-अलग इलाकों में दस से बारह घंटे तक की बिजली कटौती की गयी. जिसकी वजह बिजली की अनुपलब्धता रही.

रांची विद्युत आपूर्ति क्षेत्र में बिजली उपलब्धता में 20 मेगावाट तक की कमी पायी गयी. जिससे इलाके में कटौती हुई. बिजली की कमी से नामकुम, हटिया और कांके ग्रिड को बिजली कम मिली.

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डीवीसी एरिया में जारी है कटौती

डीवीसी कमांड एरिया में 6 नवंबर से बिजली कटौती जारी है. जिससे डीवीसी के सात जिलों में सात घंटे तक की बिजली कटौती जारी है. मामले में अभी तक ऊर्जा विभाग को समाधान नहीं निकाल पाया है. बता दें, डीवीसी राज्य से बकाया भुगतान की मांग कर रहा है.

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बिजली की मांग

राज्य में सामान्य दिनों में 1200 से 1300 मेगावाट तक बिजली की मांग रहती है. जबकि राज्य को मिलनेवाली बिजली पहले 1250 मेगावाट तक रहती थी.

इसमें से टीटीपीएस और सिकिदरी प्लांट में उत्पादित बिजली भी शामिल है. टीटीपीएस की बात करें तो इसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 210-210 मेगावाट प्रति यूनिट है. प्रत्येक यूनिट से 153 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाता है.

वहीं आधुनिक पावर प्लांट से 183 मेगावाट, सिकिदरी से 105 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है. जबकि सेंट्रल पूल से 700 मेगावाट तक बिजली दी जाती है. जिसमें 50 से 60 फीसदी कमी है.

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