
Ranchi : झारखंड में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बीपीएल बच्चों की पढ़ाई को लेकर ना तो विभाग गंभीर है, ना निजी स्कूल सजगता दिखाते हैं और ना ही अभिभावकों को इसकी पूरी जानकारी ही है, तभी बीते 11 साल में राज्य के निजी स्कूलों से महज 21 हजार बीपीएल बच्चे ही आरटीई के तहत पढ़ाई कर पाए हैं. जबकि इन बच्चों की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार की ओर से निजी स्कूलों को लगभग 11 करोड़ रुपये बतौर फीस दिए जा चुके हैं. राज्य की राजधानी रांची में आरटीई के तहत एडमिशन के आंकड़े हर साल तय लक्ष्य के आधे से भी कम होते हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे राज्य में आरटीई के तहत एडमिशन लेने और पढ़ाई पूरी करने वाले स्टूडेंट्स की क्या स्थिति होगी.
रांची में 1052 सीटों में आरटीई के तहत होता है एडमिशन
राजधानी रांची में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत तकरीबन एक सौ स्कूलों में एडमिशन लिया जाता है. जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के आंकड़े के अनुसार रांची के निजी स्कूलों में बीपीएल बच्चों के लिए 1052 सीटें रिजर्व हैं. इन्हीं 1052 सीटों में एडमिशन के लिए प्रत्येक साल आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, लेकिन हर साल आधे से भी कम सीटों में ही एडमिशन हो पाता है. जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त आंकड़े के अनुसार साल 2020-21 में केवल 402 और साल 2021-22 में 435 बीपीएल बच्चों का ही निजी स्कूलों में दाखिला हो सका है. साल 2019-20 में यह आंकड़ा महज 350 के करीब था.
एक बच्चे पर 51 सौ रुपये खर्च करती है सरकार
बताते चलें कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बीपीएल बच्चों की फीस राज्य सरकार वहन करती है. प्रत्येक साल एक बच्चे पर राज्य सरकार 51 सौ रुपये खर्च करती है. ट्यूशन फीस के रूप में 245 रुपये का भुगतान किया जाता है. राज्य सरकार की ओर से निजी स्कूलों को बीपीएल बच्चों की पढ़ाई के एवज में बीते 11 साल में 11 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. बताते चलें कि झारखंड में शिक्षा का अधिकार अधिनियम साल 2011-12 से लागू हुआ. राज्य शिक्षा परियोजना के आंकड़े के अनुसार राज्य भर में तकरीबन 400 निजी स्कूलों है जहां बीपीएल बच्चों का एडमिशन लिया जाता है.




