
Ranchi: विधायक सरयू राय ने नन रजिस्टर्ड अस्पतालों को सीएम गंभीर बीमारी उपचार योजना से अवैध तरीके से लाभान्वित किये जाने पर चिंता जतायी है. सीएम हेमंत सोरेन को गुरुवार को लेटर लिखकर शिकायत भी की है.
कहा है कि योजना के तहत बीपीएल एवं 72,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है. विभाग द्वारा सूचीबद्ध रोगों के उपचार हेतु चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है.
यह राशि सरकार द्वारा अनुबंधित अस्पतालों को अग्रिम भेज दी जाती है जहां रोगी का उपचार होना है या हो रहा है. पर जमशेदपुर और आदित्यपुर में ऐसे अस्पतालों को भी चिकित्सा राशि भेज दी गई है जो इसके लिये सरकार की सूची में अनुबंधित नहीं हैं. सरकार इसकी जांच कराये. इसके अलावे भी उन्होंने दो बिंदुओं पर सरकार को जांच करने का आग्रह किया है.
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आनंद ने उपचार योजना की धांधली पर उठाया सवाल
सरयू राय के मुताबिक गंभीर बीमारी उपचार योजना में गड़बड़ियों पर 111 सेव लाईफ अस्पताल के चेयरमैन डॉ ओ पी आनन्द ने 20.07.2020 को मंत्री बन्ना गुप्ता को लिखा था.
बताया था कि योजना के तहत गैर अनुबंधित अस्पतालों को भी चिकित्सा राशि का भुगतान किया जा रहा है जो नियमानुसार गलत है.
इसकी जांच होनी चाहिये और दोषियों पर कारवाई होनी चाहिये. आनंद का इस तरह से लिखा जाना विभाग को संभवतः रास नहीं आया. इसका खामियाजा वे गिरफ्तारी के रूप में भुगत रहे हैं.
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मंत्री के नाम पर ब्लैकमेलिंग
दो व्हाट्सएप संवाद का स्क्रिन शॉट जारी करते हुए सरयू ने कहा कि लाइफ सेवर्स अस्पताल ने स्वास्थ्य मंत्री को एक शिकायत की थी. 22 अप्रैल, 2021 एवं 29 अप्रैल, 2021 को की गयी इस शिकायत में मंत्री से निवेदन किया गया है कि उनका नाम लेकर लोग अस्पताल पर बिल माफ करने का दबाव बनाते हैं. अस्पताल बंद कराने की धमकी देते हैं और बिल नहीं देते हैं. यह एक गंभीर मामला है. इसकी जांच जरूरी है.
जमशेदपुर के सिविल सर्जन डॉ अरविन्द कुमार लाल सरकारी नौकरी में रहते हुए 2005 में बिहार के झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधान सभा का चुनाव लड़े.
उन्होंने नामांकन में यह नहीं बताया कि वे झारखंड सरकार में पूर्वी सिंहभूम के जिला फाइलेरिया पदाधिकारी हैं. सरकारी सेवा में रहते हुए कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता.
उसे त्यागपत्र देकर चुनाव लड़ना पड़ेगा या बिना त्यागपत्र दिये चुनाव लड़ने के लिये सरकार उस पर कार्रवाई करेगी. इस मामले की भी पड़ताल हो. आरोप लगने के बाद भी उनकी प्रोन्नति होती रही.
उन्हें सभी प्रकार के लाभ मिलते रहे. प्रोन्नत होकर वे पूर्वी सिंहभूम जिला के प्रभारी सिविल सर्जन पद पर पदस्थापित हैं. इन सभी केस की ठीक से जांच हो.
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