
Ranchi: प्रिजर्वेशन यूनिट वितरण में फर्जीवाड़े की जांच के लिए झारखंड सरकार के कृषि विभाग की ओर से एक जांच कमिटी गठित की गई थी. विभागीय सचिव अबू बक्कर सिद्दीख के आदेश पर गठित कमेटी निर्धारित समय पूरा हो जाने के करीब एक माह बाद भी रिपोर्ट नहीं दे पाई है. बता दें कि फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने के बाद सचिव ने इस मामले में एक्शन लेते 4 सदस्यीय एक जांच समिति गठित करने का आदेश 5 जनवरी 2023 को जारी किया. 10 दिनों में यानि 15 जनवरी तक जांच रिपोर्ट मांगी थी. महीना बीत गया. अब तक जांच समिति सात जिलों के उद्यान विभाग से प्रिजर्वेशन यूनिट की आपूर्ति संबंधी और दूसरे कागजात मांगने का कोरम मात्र ही कर सकी है.
मालूम हो कि झारखंड के 7 जिलों में 2016-17 से 2021-22 की अवधि में किसानों के बीच प्रिजर्वेशन यूनिट बांटी गयी थी. देवघर, बोकारो, कोडरमा, गढ़वा, बोकारो, धनबाद, गोड्डा और गिरिडीह जिले में बांटी गयी इस यूनिट में कई स्तरों पर शिकायतें सामने आयी. लोकप्रिय न्यूज पोर्टल न्यूज विंग में इस यूनिट की आपूर्ति में फर्जीवाड़े, गड़बड़ियों को लेकर खबर चलीं. इसके बाद अन्य प्लेटफॉर्म पर भी इससे संबंधित खबरें प्रकाशित हुईं. इसके बाद कृषि, पशुपालन विभाग, झारखंड ने इसकी जांच कराने की पहल की.
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क्या कहा था सचिव ने
सचिव अबू बक्कर सिद्दीख ने आदेश जारी करते कहा था कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक कृषि, पशुपालन विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय बागवानी मिशन के द्वारा सात जिलों में प्रिजर्वेशन यूनिट बांटी गयी थी. दो लाख की जगह 25 हजार की प्रिजर्वेशन यूनिट बांट कर अनुदान के करोड़ों रुपये सप्लायरों द्वारा हड़प लिए जाने की खबर सामने आयी है. यह गंभीर प्रकृति का आरोप है. संयुक्त कृषि निदेशक (अभियंत्रण) अजेश्वर प्रसाद सिंह, लव कुमार (सहायक निदेशक, उद्यान), सावन कुमार (सहायक निदेशक, सांख्यिकी एवं मूल्यांकन) तथा रुपक कुमार देशभता (सहायक कृषि अभियंता) को जांच समिति में शामिल किया गया. समिति को सचिव ने सात चिन्हित जिलों में 2016-17 से 2021-22 तक की स्वीकृत प्रिजर्वेशन यूनिट इकाई के संदर्भ में इसका भौतिक सत्यापन तथा स्वीकृत मानकों के अनुरूप वितरित किए गये उपकरणों एवं इस मद में निर्धारित दर, आपूर्तिकर्ता को भुगतान की गयी राशि, कृषकों से प्राप्त अंशदान की राशि, ब्याज दर से ज्यादा दर पर भुगतान की गयी राशि के बिंदु पर जांच करने को कहा था. बोकारो से जांच प्रारंभ करने और जांच के संबंध में जांच प्रतिवेदन के साथ रंगीन फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने को कहा था. कृषकों के साथ बात करने और उनके द्वारा दिए गये अंशदान एवं उपलब्ध कराए गये उपकरण के संदर्भ में भी जरूरी सूचना लेने को कहा गया.
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क्या है स्थिति
झारखंड किसान महासभा के प्रतिनिधियों ने दो-तीन दफा कृषि निदेशालय, रांची के कार्यालय जाकर प्रिजर्वेशन यूनिट की जांच के संबंध में जानकारी मांगी. पर जांच समिति के सजस्यों द्वारा बताया गया कि अभी तक संबंधित 7 जिलों के उद्यान पदाधिकारियों के स्तर से जरूरी कागजात पूरी तरह नहीं मिले हैं. कागजात मिलने के बाद ही आगे जांच होगी. महासभा के प्रमुख राजू कुमार महतो, महासचिव पंकज राय ने जांच समिति और सरकार की मंशा पर आशंका जाहिर की है. कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि सरकार प्रिजर्वेशन यूनिट घोटाले की जांच को लेकर गंभीर है. लीपापोती की संभावना लग रही. महीनेभर में भी जांच पूरी नहीं हो सकी है. ऐसे में अब किसान महासभा इस महीने किसी भी दिन कृषि निदेशालय का घेराव करेगी. जरूरत पड़ने पर आगे और भी कदम उठाए जाएंगे.




