
Amit Jha
Ranchi: जिस प्रिजर्वेशन यूनिट के लिए कृषि विभाग, झारखंड दो लाख की लागत बताता है, बोकारो के किसानों को वह फ्री में दी गयी है. सौर ऊर्जा औऱ बिजली से चलने वाली इस यूनिट का लाभ वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिन लाभुकों को मिला है, उनसे ना तो एक रुपया विभाग ने लिया है, ना किसी को एक रुपये का अनुदान दिया है. इससे उनके सामने भ्रम की स्थिति बनी हुई है. हालांकि जिला कृषि पदाधिकारी मानते हैं कि प्रिजर्वेशन यूनिट के लिए सरकार और लाभुक के बीच 50:50 फीसदी खर्च वहन होता है. दो लाख रुपये में एक लाख सरकार किसानों को अनुदान देती है. बाकी व्यय लाभुक को करना है. पर न्यूज विंग ने अपने पड़ताल में पाया कि बोकारो में लाभुकों को ना तो एक रुपया प्रिजर्वेशन यूनिट के लिए देना पड़ा है, ना सरकार ने एक भी रुपया उनके खाते में दिया है.
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मिर्ची सुखाने में मशीन कारगर
बेरमो ब्लॉक के अहरियाटांड़ गांव में रहने वाले कृष्ण रजक बताते हैं कि पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल में उनके खेत में प्रिजर्वेशन यूनिट लगी है. बीटीएम (ब्लॉक टेक्निकल मैनेजर) गौतम ने उनसे संपर्क करके इसे लगाने की सलाह दी थी. कहा था कि सब्जियों में नमी, ताजगी बनाए रखने में मशीन कारगर है. लंबे समय तक सब्जियां, मसाले इसमें सुरक्षित रहेंगे. इसके बाद 2021 में इसके लिए आधार कार्ड, फोटो के साथ आवेदन किया. मार्च 2022 के आखिर में यह मशीन उन्हें मिला. हालांकि इसके लिए ना तो एक भी रुपया मिला ना ही मांगा गया है. करीब सालभर से वे इस मशीन के जरिये मिर्ची और सब्जियों को ताजा बनाए रखने को स्टोर करते हैं. सामान्य चदरे से बनी इस मशीन की कीमत उनकी समझ से अधिक से अधिक 30-50 हजार या इससे कुछ अधिक हो सकती है. मशीन के बारे में कोई भी ट्रेनिंग आज तक नहीं मिली.
शो-पीस बना है प्रिजर्वेशन यूनिट
गोपालपुर गांव चास ब्लॉक के सुनील कुमार महतो के फॉर्म पर भी 2022 में प्रिजर्वेशन यूनिट कुछ लोगों ने पहुंचाया. उस समय वे अपने गांव से बाहर थे. उनकी अनुपस्थिति में यह यूनिट घर पर पहुंचा दी गयी. मौखिक तौर पर इसे इंस्टॉल करने और उपयोग की बात कह दी गयी. पर चूंकि इसके बाद फिर किसी ने संपर्क नहीं किया सो समझ और जानकारी के अभाव में उनके घर के लोग सालभर से इसका इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे हैं. यह शोपीस बनकर जैसे का तैसे ही रखा हुआ है.
कसमार ब्लॉक के खैराचातर गांव में रहने वाले किसान विजय भगत बताते हैं कि उनके गांव में एक कृषि मित्र के यहां उन्होंने प्रिजर्वेशन यूनिट देखा था. चर्चा के बाद एक फॉर्म उन्होंने भी भरा. आधार कार्ड, फोटो और जमीन की रसीद जमा की. इसके 4-5 माह बाद पिछले वर्ष संभवतः जनवरी-फरवरी में यह मशीन आयी. मशीन के लिए एक फोन आया था. इसे लेकर कुछ लोग आये. उनके खेत में इंस्टॉल करके और चालू करके भी दिखा दिया. एक झोंपड़े के ऊपर इस मशीन का सोलर प्लेट रखते हैं. मशीन फिलहाल कारगर है हालांकि आसपास के कई किसानों के खराब भी हो गये हैं. इसकी प्रॉपर ट्रेनिंग अगर मिली होती तो अच्छा होता. इस मशीन के लिए एक रुपया ना तो लिया गया है ना किसी तरह का अनुदान आया है.
इतने किसानों को मिला है लाभ
गौरतलब है कि आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक बोकारो जिले में पिछले तीन वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2021-22 में 74 किसानों को प्रिजर्वेशन यूनिट का लाभ दिया गया है. 2019-20 में 50 किसानों को, 2020-21 में 9 और 2021-22 में 15 किसानों को इससे लाभान्वित किया गया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
बोकारो के जिला कृषि पदाधिकारी उमेश तिर्की ने न्यूज विंग से कहा कि पिछले ही वर्ष उन्होंने जिले में योगदान दिया है. प्रिजर्वेशन यूनिट योजना पूरी तरह से अनुदान वाली (50:50) है. ट्रेनिंग और दूसरी समस्या वाली बात अगर है तो वे इसे देखते हैं. अनुदान मिलने या नहीं मिलने वाले मसले का भी वे पता लगाते हैं.




