
Ranchi: खूंटी के फेमस डोंबारी बुरू के अलावा राज्य सरकार के स्तर से पेरवाघाघ वाटर फॉल के सुंदरीकरण की तैयारी है. इसके लिए ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की ओर से योजना फाइनल की गयी है. झारखंड के जालियांवाला के तौर पर पहचान रखने वाले डोंबारी बुरू (मुरहू, खूंटी) के सुंदरीकरण के लिए करीब 40 लाख रुपए (39,49,100/-) की प्राक्कलित राशि तय की गई है. इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है. 19 जून को इसके लिए आवेदन की बिक्री होगी जबकि 20 जून तक इसे जमा करना होगा. इसी दिन इसे खोला भी जाएगा. जिसे भी यह कार्य आवंटित होगा, उसे 2 माह में निर्धारित कार्यों को पूरा करना होगा. जानकारी के लिए ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, खूंटी के नोटिस बोर्ड को देखा जा सकता है.
पेरवाघाघ वाटर फॉल के पास इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क और एक्सटर्नल साइट डेवलपमेंट वर्क होने हैं. इस काम के लिए एनआरइपी, खूंटी ने 8,82,76,323 रुपए तय किए हैं. इसके लिए भी निविदा सूचना जारी कर दी गई है. 24 जून तक आवेदन जमा होंगे. वेबसाइट www.jharkhandtenders.gov.in से जानकारी ली जा सकती है.

यहां खुलेंगे डिग्री कॉलेज
झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में डिग्री कॉलेज भवन बनाने की तैयारी शुरू की है. निगम ने हाट गम्हरिया, बंदगांव (पश्चिमी सिंहभूम) के अलावा मेराल (गढ़वा), चाकुलिया, पोटका (पूर्वी सिंहभूम) सहित अन्य हिस्सों में भी कॉलेज भवन बनाने के लिए पहल की है. इससे संबंधित जानकारी वेबसाइट www.jharkhandtenders.gov.in से ले सकते हैं.
झारखंड का जालियांवाला बाग है डोंबारी बुरु
गौरतलब है कि आजादी के आंदोलन में वर्तमान के झारखंड में भी जालियांवाला बाग जैसी घटना घट चुकी है. जालियांबाला बाग की घटना से 20 वर्ष पूर्व घटी घटना में खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड क्षेत्र के डोंबारी बुरु में सैकड़ों आदिवासियों को अंग्रेज सिपाहियों ने चारों ओर से घेरकर भून दिया था. आज से 122 साल पहले नौ जनवरी 1899 को अंग्रेजों ने डोंबारी बुरु में निर्दोष लोगों को चारों तरफ से घेर कर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं. डोंबारी बुरु में भगवान बिरसा मुंडा अपने 12 अनुयायियों के साथ सभा कर रहे थे. सभा में आस-पास के दर्जनों गांव के लोग भी शामिल थे. इनमें महिलाएं और बच्चे भी थे. बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ लोगों में उलगुलान की बिगुल फूंक रहे थे. अंग्रेज को इस सभा की खबर हुई. अंग्रेज सैनिक वहां धमके और डोंबारी पहाड़ को चारों तरफ से घेर लिया. वे लोगों पर कहर बनकर टूट पड़े. बिना कोई सूचना के अंग्रेज सैनिकों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. बिरसा मुंडा ने भी अपने समर्थकों के साथ पारंपरिक हथियारों के दम पर अंग्रेजों का जमकर सामना किया. इस संघर्ष में सैकड़ों लोग शहीद हो गए. हालांकि, बिरसा मुंडा अंग्रेजों को चकमा देकर वहां से निकलने में सफल रहे. इस स्थल पर किए गए पत्थलगड़ी में मात्र छह लोगों का ही नाम दर्ज है. इनमें गुटुहातु के हाथीराम मुंडा, हाड़ी मुंडा, बरटोली के सिगराय मुंडा, बंकन मुंडा की पत्नी, मझिया मुंडा की पत्नी और डुंडंग मुंडा की पत्नी शामिल हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि उस संघर्ष में लगभग चार लोग मारे गए थे. लोग डोंबारी बुरु को झारखंड का जालियांबाला बाग कहते हैं. इस घटना के बाद हर साल यहां नौ जनवरी को मारे गए लोगों की याद में शहादत दिवस मनाया जाता है.
पेरवाघाघ जलप्रपात की खासियत
यह जलप्रपात सालों भर पानी से लबालब रहता है. फटका पंचायत में छाता नदी पर स्पष्ट जलप्रवाह के साथ एक सुंदर झरना गिरता है. यह नदी खूंटी जिले में बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है. इस जलप्रपात की गहराई काफी है. इसे सुग्गाकटा जलप्रपात भी कहते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक जिस पत्थर से पानी गिरता है, वो तोते के आकार का दिखता है. इस कारण इसे सुग्गाकटा जलप्रपात भी कहते हैं. पर्यटकों के लिए यह एक मनोहर स्पॉट है.





