Opinion

प्रेमकुमार मणि का पीएम मोदी को पत्र– “जब संक्रमण फैल रहा था, आपने कुछ नहीं किया”

प्रधानमंत्री जी,

सम्पूर्ण देश के साथ मैं भी घर में दुबका हुआ कोरोना व्याधि के खिलाफ जंग लड़ रहा हूं. यह मेरा अनुशासन भी है और अपने प्रधानमंत्री के आवश्यक अनुदेशों का पालन भी. जिसे एक नागरिक के तौर पर हर किसी को करना चाहिए. मैं पूरी तरह इस नतीजे पर हूं कि इससे बेहतर कोई उपाय नहीं है. इस व्याधि से जूझने का.

उम्मीद करता हूं कि रोग पर काबू पाने में हम जल्दी ही सफल होंगे. यह भी उम्मीद है कि हमारे मुल्क और दुनिया के काबिल वैज्ञानिक जल्दी ही इसके उन्मूलन के लिए कोई कारगर दवा ढूंढ निकालेंगे.

लेकिन यहीं पर आपसे कुछ बातें कहनी थी. 24 मार्च को जब आप मुल्क को संबोधित कर रहे थे, तब आपने कहा कि 67 दिनों में इस व्याधि से एक लाख लोग ग्रसित हुए, अगले 11 रोज में और एक लाख लोग हो गए. उससे अगले केवल चार रोज में ही और एक लाख लोग हो गए. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक WHO के मुताबिक, आक्रांत लोगों की संख्या चार लाख से ऊपर हो गयी है. मतलब पिछले चौबीस घंटों में ही और एक लाख लोग कोरोना के मरीज हो गए. बढ़ोत्तरी की दर बहुत खतरनाक है.

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यहीं आपसे पूछना चाहूंगा कि आपको तो सब पता था. WHO ने भी आपको ससमय सूचनाएं दी ही होंगी. आपकी अपनी एजेंसियां काम कर रही हैं. इस जीवाणु युद्ध से मुकाबले में आप इतने पिछड़ कैसे गए ?  अनेक देश जिसमें चीन सबसे आगे है, ने चुस्ती दिखला कर इस व्याधि पर काबू पा लिया है. आपकी लापरवाही की सजा पूरा देश भुगत रहा है.

जब आपको सूचनाएं मिली तब आप कर क्या रहे थे?  आप तो मार्च के दूसरे हफ्ते में जागे. तब तक पानी बहुत ऊपर आ चुका था. आपने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की और उसे प्रहसन बनाने के लिए ताली और थाली पिटवाने की व्यवस्था भी कर दी. आपने कहा कि यह डाक्टरों का हौसला बढ़ाने के लिए किया जा रहा था.

आपको जो समय मिला था, उसमें आपको अपने अस्पतालों को चुस्त-दुरुस्त करना था. चीन में दस रोज में हज़ार बिस्तरों के अस्पताल बन जाते हैं. हमारे यहां भी महीना भर में कई अस्पताल बन जाते. आपने ध्यान नहीं दिया. जिस वक़्त आप नागरिकता संशोधन कानून और राम मंदिर में देश भर को उलझाए हुए थे, वही वक़्त इस बीमारी के फैलने का था. अलगाव कैंप तो दरअसल उन लोगों के लिए बनना चाहिए था, जो विदेशों से इस बीच लौट रहे थे.

आपको सीमायें सील करनी थी और तमाम हवाई अड्डों पर सघन जांच कैंप बनवाने थे. कुछ हज़ार या लाख लोग विदेशों से लौटे होंगे. उन सबको यदि एक महीने सुरक्षित शिविरों में रख कर ही बाहर आने की अनुमति होती तो खतरा होता ही नहीं. क्योंकि यह बीमारी बाहर से आये हुए लोगों द्वारा ही फैली है. अब तक कोई मरीज ऐसा नहीं मिला है,  जो भारत से बाहर नहीं गया हो और जिसे यह बीमारी हुई हो. हां, अब संभव है. क्योंकि जीवाणु संक्रमित लोग देश भर में फैल चुके हैं.

लेकिन आप इस बीच राजनीति करते रहें. आज भी आप वही कर रहे हैं. हवाई जहाज तब तक बंद नहीं किये गए जब तक आपका मध्यप्रदेश ऑपरेशन हो नहीं गया. इसलिए कि आपको विधायकों की हवाई ढुलाई करवानी थी. डाक्टरों के लिए तालियां और घंटे बजा कर आप के लोग वैज्ञानिकों और चिकित्सकों की हौसला आफजाई नहीं करा रहे थे, वे मनोरंजन और एक भावी कार्रवाई का जश्न मना रहे थे.

अगले रोज आपका फ़ौज-फाटा एक तरफ दिल्ली के शाहीनबाग को उजाड़ कर उनके इश्तेहार मिटा रहा था तो दूसरी तरफ आपके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रामलला की मूर्तियां ‘ वाजिब’  जगह पर रखवा रहे थे. मध्यप्रदेश में राजतिलक का जश्न मनाने में कर्फ्यू बाधक नहीं बनी, लेकिन लाखों दिहाड़ी मजदूर और आमजन पुलिसिया ज़ुल्म के शिकार हुए.

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यह 21 दिनों (यदि और लंबा ही खिंचा तो ) का संकट बस आपके कारण है. ऐसा लगता है आप को चस्का लग चुका है. कश्मीर को महीनों कैदखाने में बदलकर आपको लगा होगा, पूरे देश को एक दफा इस दशा में ले आओ. यह एक मनोदशा होती है. परपीड़न का सुख इसे ही कहते हैं.

प्रधानमंत्री जी,  आज के ज़माने में कोई देश समाज वैज्ञानिक नजरिये और तकनीक के विस्तार से ही मजबूत होगा. रामजी और रहीमजी देश को मजबूत नहीं करेंगे. आपको लगता है ताली पीटने वाले लोग आपके मित्र हैं और मेरे जैसे लोग शत्रु.

आप ही कहते हो चाय बेचने वाले परिवार से आता हूं. यदि यह सच है, तो उनलोगों की पीड़ा समझो, जो मिहनतक़श हैं, दिहाड़ी मजदूर हैं, किसान हैं. वे सब अपने मुल्क से अपनी माटी से प्यार करते हैं. आपके लिए ताली बजाने वाले लोग अपना स्वार्थ साधते हैं.

इन साधु जोगियों के कब्जे से बाहर आओ प्रधानमंत्रीजी. देश और दुनिया खतरे में है. मानव जाति का अस्तित्व ही खतरे में है. मतभेदों को भूल कर, तंग नजरिये को त्याग कर हमें आगे बढ़ना होगा. पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति चरमरा चुकी है. अपने देश की तो और भी. हमें समग्रता में सोच कर काम करना होगा .

भवदीय,

प्रेमकुमार मणि

(पटना के रहने वाले प्रेम कुमार मणि बड़े लेखक हैं, वो जदयू से विधान पार्षद भी रहें. यह लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है.)

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न्यूज विंग की अपील

देश में कोरोना वायरस का संकट गहराता जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि तमाम नागरिक संयम से काम लें. इस महामारी को हराने के लिए जरूरी है कि सभी नागरिक उन निर्देशों का अवश्य पालन करें जो सरकार और प्रशासन के द्वारा दिये जा रहे हैं. इसमें सबसे अहम है खुद को सुरक्षित रखना है. न्यूज विंग की आपसे अपील है कि आप घर पर रहें. इससे आप तो सुरक्षित रहेंगे ही दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे.

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