
Ranchi: विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की किस्मत का फैसला एकबार फिर टल गया है. प्रभुनाथ सिंह जेल में रहेंगे या आजाद होंगे, इस बारे में झारखंड हाई कोर्ट अब 24 मार्च को फैसला सुनायेगा.
बता दें कि प्रभुनाथ सिंह को निचली अदालत द्वारा विधायक अशोक सिंह की हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पूर्व सांसद को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है. जिसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की है.
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इससे पहले भी याचिका पर टल गया था फैसला
बिहार के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह की अपील याचिका पर बीते 24 फरवरी को फैसला टल गया था. जस्टिस एके गुप्ता व जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने इस मामले में तीन मार्च को सजा सुनाने वाली थी, लेकिन फैसला एकबार फिर टल गया. पूर्व में तीनों की अपील याचिका पर सुनवाई पूरी होने बाद झारखंड हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
24 फरवरी को फैसला सुनाया जाना था. लेकिन अपरिहार्य कारणों से फैसला नहीं सुनाया जा सका था. ज्ञात हो कि मशरख विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में हजारीबाग की निचली अदालत ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह और उनके भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. निचली अदालत की सजा के खिलाफ तीनों ने हाई कोर्ट में अपील की है.
दिवगंत अशोक सिंह की पत्नी ने की है फांसी की मांग
मशरख के दिवंगत विधायक अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी को पूर्व सांसद व आरजेडी नेता प्रभुनाथ सिंह को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद है. विधायक की पत्नी चांदनी देवी की लिखी एक चिट्ठी वायरल हुई थी.
इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि ‘मैं एक ऐसी अबला नारी हूं, जो पिछले 25 वर्षों से पति व मशरख के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह के हत्यारे को फांसी दिलाने के लिए जंग लड़ रही हूं, किंतु जंग अब भी अधूरा है.’
चांदनी देवी ने चिट्ठी में कहा था कि उनके पति अशोक सिंह ने हत्या के दिन ही तत्कालीन डीजीपी और सारण के एसपी पत्र लिख कर प्रभुनाथ सिंह द्वारा हत्या किये या कराये जाने की आशंका जताते हुए सुरक्षा की गुहार लगायी थी.
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हजारीबाग कोर्ट ने प्रभुनाथ को ठहराया है दोषी
हजारीबाग की अदालत ने 18 मई 2017 को पूर्व सांसद और आरजेडी नेता प्रभुनाथ सिंह को 25 वर्ष पूर्व हुए विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिया था.
अदालत के दोषी करार दिए जाने के बाद प्रभुनाथ सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था. हजारीबाग जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह को इस मामले में दोषी ठहराया.
अशोक सिंह 1995 में बिहार में मशरख निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. उन्होंने प्रभुनाथ सिंह को हराया था. इस चुनावी जीत के 90 दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई. 1995 में प्रभुनाथ सिंह जनता दल में थे और बाद में वह जनता दल (युनाइटेड) शामिल हो गए थे.
प्रभुनाथ ने खुले तौर पर कहा था अशोक सिंह की 90 दिनों के भीतर हत्या कर दी जाएगी
मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, अशोक सिंह के भाई तारकेश्वर सिंह ने मीडिया को बताया था कि उनके भाई ने 1995 में प्रभुनाथ सिंह को चुनाव में हरा दिया था.
इसके बाद प्रभुनाथ ने खुले तौर पर कहा था कि अशोक सिंह के विधायक बनने के 90 दिनों के भीतर उसकी हत्या कर दी जाएगी और 90 दिन बाद 3 जुलाई, 1995 को पटना में उनके सरकारी आवास में बम मार कर उनकी हत्या कर दी गई.
अशोक सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी चांदनी देवी ने प्रभुनाथ सिंह और उनके दो भाइयों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बिहार से झारखंड की हजारीबाग अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था.
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