
Ranchi: डीवीसी की ओर से राज्य में बिजली कटौती पर नीति आयोग ने राज्य सरकार से प्लान मांगा है. एक दिन पूर्व नीति आयोग और राज्य सरकार के बीच हुई बैठक में बिजली कटौती का मुद्दा छाया रहा. जिसमें कोयला, उर्जा, जल संशाधन समेत अन्य विषयों पर चर्चा की गयी. राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट के आधार पर डीवीसी बिजली कटौती पर रोक लगायेगी. ये प्लान डीवीसी को बकाया भुगतान करने के लिए मांगा गया है.
ऐसा पहली बार है हुआ जब नीति आयोग के साथ राज्य के मुद्दों और विशेषकर डीवीसी के मामले पर बैठक की गयी. हालांकि, बिजली कटौती का मुद्दा पिछले पांच-छह सालों से बरकरार है. साल 2020 में दो बार डीवीसी ने कटौती की गई थी.
जिसके बाद केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. नतीजा शून्य रहा था. अब नीति आयोग की ओर से प्लान मांगा गया है. प्लान के बावजूद राज्य में डीवीसी का मामला सुलझने में समय लग सकता है. क्योंकि मामला त्रिपक्षीय है.
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बतौर पक्ष केंद्र सरकार, आरबीआइ और राज्य सरकार शामिल हैं. जाहिर है तीनों की प्लान पर सहमति के बाद ही समाधान सिरे चढ़ सकता है.
साल 2020 से समय-समय पर की गयी कटौती: डीवीसी और जेबीवीएनएल के बीच मामला साल 2020 से गरमाया. जब डीवीसी ने कटौती शुरू की. साल 2020 के शुरूआती दिनों में डीवीसी ने 5608 करोड़ के भुगतान के लिये जेबीवीएनएल को नोटिस भेजा. इसके बाद फरवरी से डीवीसी ने सात जिलों में बिजली कटौती शुरू की. इस दौरान लगभग 25 दिन बिजली कटौती की गयी. मार्च में विभाग की ओर से उच्चस्तरीय बैठक हुई.
जिसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल की गयी. साल 2020 जून में फिर से डीवीसी ने 4995 करोड़ भुगतान के लिये जेबीवीएनएल को नोटिस भेजा. कोविड संक्रमण के कारण मामला सिर्फ नोटिस तक रहा. लेकिन सितंबर में फिर से डीवीसी ने कटौती शुरू की.
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इसके बाद फिर से विभाग ने उच्चस्तरीय बैठक की और आपूर्ति बहाल हुई. दिसंबर में फिर से डीवीसी ने 4950 करोड़ बकाया की मांग की. इस दौरान भी बिजली कटौती की गयी.
पिछले साल केंद्र ने की कटौती: भुगतान पर पिछले साल अक्टूबर में केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया. इसके साथ ही केंद्रीय उर्जा मंत्रालय ने आरबीआइ को राज्य मद से कटौती करने का निर्देश दिया. 16 अक्टूबर 2020 में 1417 करोड़ की कटौती राज्य मद से हुई. इसके बाद 13 जनवरी को केंद्र सरकार ने 714 करोड़ रूपये की कटौती की.
तब जेबीवीएनएल का डीवीसी पर कुल बकाया लगभग पांच हजार करोड़ रहा. केंद्र से कटौती के बाद पूर्व का बकाया अब भी लगभग तीन हजार करोड़ है.
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वर्तमान में राज्य सरकार हर महीने 170 करोड़ की बिजली डीवीसी से ले रही है. जनवरी से हर महीने मात्र सौ करोड़ बिजली बिल भुगतान किया गया. हर महीने 70 करोड़ बकाया. वर्तमान बकाया लगभग 3700 करोड़ के आसपास है.
हर महीने बिजली बिल भुगतान पर सहमति बनी थी: डीवीसी के बकाये भुगतान के लिये राज्य में दो बार उच्चस्तरीय बैठक हुई थी. उर्जा विभाग, जेबीवीएनएल डीवीसी अधिकारियों की बैठक 14 मार्च 2020 को हुई. इसके तहत हर महीने बिजली खरीद का पैसा जेबीवीएनएल समय पर डीवीसी को भुगतान करेगी.
इस पर सहमति बनी. लेकिन कोरोना लॉकडाउन और राजस्व नुकसान के बाद जेबीवीएनएल ऐसा नहीं कर सकी. वहीं, एक अक्टूबर 2020 को फिर से उच्च अधिकारियों की बैठक हुई.
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हालांकि अधिकारियों ने बैठक को सकारात्मक बताया. लेकिन 16 अक्टूबर को आरबीआइ की ओर से राज्य मद से कटौती की गयी.
सितंबर में होनी थी कटौती: इस साल सितंबर में राज्य सरकार की ओर से आरबीआइ को रिक्वेस्ट लेटर भेजा गया. जिसमें राज्य मद से बकाया राशि कटौती नहीं करने की मांग की गयी.
आरबीआइ ने कटौती नहीं की. आरबीआइ की ओर से सितंबर और दिसंबर में राज्य मद से 1125.845 करोड़ की कटौती की जानी है.
मालूम हो कि डीवीसी धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, कोडरमा, रामगढ़, चतरा और हजारीबाग में बिजली आपूर्ति कर रहा है.
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बता दें राज्य सरकार को त्रिपक्षीय समझौते के तहत डीवीसी से बिजली मिलती है. छह जनवरी 2021 को राज्य सरकार ने त्रिपक्षीय समझौते से बाहर निकलने की घोषणा की. लेकिन आरबीआइ की कटौती जारी रही.
जेबीवीएनएल राजस्व वसूली महत्वपूर्ण: डीवीसी के बकाया भगतान में जेबीवीएनएल की राजस्व वसूली महत्वपूर्ण है. जेबीवीएनएल हर महीने लगभग 550 करोड़ की बिजली अलग अलग बिजली उत्पादक कंपनियों से लेती है.
जबकि बिजली बिल से राजस्व वसूली मात्र 350 से 400 करोड़ तक हो रही है. वहीं, डीवीसी का मुख्य बकाया साल 2019 के पहले का. तब जेबीवीएनएल की राजस्व वसूली 250 करोड़ तक रहा. ऐसे में राजस्व वसूली नहीं होने के कारण डीवीसी को भुगतान नहीं किया जाता.
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