
Ranchi : तकनीकी शिक्षा पर हजारों करोड़ रुपये खर्चा करने वाला झारखंड के आईटीआई को स्टूडेट्स नहीं मिल रहे हैं. यहां के निजी आईटीआई की बात छोडिये सरकारी आईटीआई को भी दो राउंड की काउंसिलिंग के बाद स्टूडेंट्स नहीं मिले. राजधानी रांची में संचालित सरकारी आईटीआई में सैकड़ों सीटें खाली रह गयी हैं. इसके अलावा राज्य भर के आईटीआई स्टूडेंट्स की राह तक रहे हैं.
झारखंड कंबाइंड एग्जामिनेशन बोर्ड की और से चलाये जा रहे एडमिशन काउंसलिंग प्रोसेस से स्टूडेंट्स नहीं मिल पाने की वजह से अब जिला स्तर पर एडमिशन शुरू कर दिया गया है. इसके लिए उपयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी बनायी गयी है. यही कमिटी एडमिशन की मंजूरी देगी. तकनीकी शिक्षा निदेशालय की और से लिए गए इस निर्णय के बाद चतरा, गढ़वा, लोहरदगा जैसे जिलों ने अपने यहां संचालित आईटीआई में एडमिशन के लिए विज्ञापन जारी किया.
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25 से लेकर 50 प्रतिशत तक सीटें रिक्त
संस्थानों में 25 से लेकर 50 प्रतिशत तक सीटें रिक्त रह गयीं हैं. वेल्डर, प्लंबर आदि कई ऐसे ट्रेड हैं जिनमें कुछ आईटीआई संस्थानों में शत-प्रतिशत सीटें रिक्त रह गयी हैं. राजधानी रांची स्थित आइटीआइ सामान्य में 340, आइटीआइ कल्याण में 119, आइटीआइ महिला में 125 तथा उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए खुले आइटीआइ में 20 सीटें रिक्त रह गयी हैं. इसी तरह, आइटीआइ बोकारो में 148, आइटीआइ नवाडीह में 20 सीटें, आइटीआइ सिमडेगा में 137, आइटीआइ बाघमारा में 79, आइटीआइ डालटनगंज में 151 तथा आइटीआइ विश्रामपुर में 106 सीटें रिक्त रह गयी हैं. इसी तरह, अन्य संस्थानों में बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह गयी हैं.
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आधारभूत संरचना की है कमी
राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों के रिक्त रह जाने के लिए संस्थानों में आधारभूत संरचनाओं की कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है. संस्थानों में अनुदेशकों की भी भारी कमी है. प्राचार्यों के पद भी रिक्त हैं. कई संस्थानों में इसकी जिम्मेदारी जिला नियोजन पदाधिकारी संभाल रहे हैं. राज्य के 59 आईटीआई में केवल 300 इंस्ट्रक्टर हैं, जबकि पद 1051 है. एक तिहाई इंस्ट्रक्टर के भरोसे हजारों छात्र तकनीकी ज्ञान की जगह केवल डिग्री ले रहे हैं. प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं होने से छात्रों का स्किल डेवलपमेंट नहीं होता है. असल में राज्य गठन के बाद नियुक्ति हुई ही नहीं. वर्तमान में जो हैं, वे वर्ष 2026 तक सभी रिटायर हो जायेंगे.




