Jharkhand

पॉलिटिकल गॉसिपः परिवार, पार्टी में बढ़ते ‘बागी सुरों’ के बीच कल्पना सोरेन के लिए आसान नहीं झामुमो की कमान संभालना

Amit Jha

Ranchi: पूर्व सीएम हेमंत सोरेन जेल जमीन घोटाला मामले में इन दिनों जेल में हैं. उनकी अनुपस्थिति में पत्नी कल्पना सोरेन ने पार्टी, संगठन की कमान संभालनी शुरू कर दी है. कुछ समय बाद होनेवाले लोकसभा चुनाव उनके लिहाज से लिटमस टेस्ट साबित होगा. ऐसे में पार्टी ही नहीं, परिवार के भीतर बागियों की उठती आवाज उनके सियासी सफर के लिहाज से चैलेंज बन सकते हैं. सियासी गलियारे के गप शप को मानें तो झामुमो परिवार में इन दिनों बागियों की संख्या बढ़ रही है.

पहले तो पार्टी प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहु सीता सोरेन ने पार्टी में कल्पना को आगे किए जाने पर पार्टी छोड़ी. साथ ही दुमका से भाजपा की कैंडिडेट बन गयी. अब पार्टी विधायक लोबिन हेंब्रम भी कल्पना के नाम पर बिदक गये हैं. राजमहल सीट से पार्टी में रहते ताल ठोकने की घोषणा कर दी है. जाहिर है, कल्पना सोरेन के साथ-साथ राज्य में सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन के लिए लोकसभा चुनाव में 14 सीटों पर मैदान मारना अग्नि परीक्षा साबित होने वाली है.

सीता से शुरू हुआ सिलसिला

हेमंत सोरेन के जेल जाने के साथ ही झामुमो परिवार में गुटबाजी खुल कर सामने आयी. पार्टी और संगठन चलाने का दारोमदार अघोषित तौर पर कल्पना सोरेन को दिए जाने को लेकर हेमंत के बड़े भाई स्व. दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता बिदक गयीं. मंत्रिमंडल विस्तार में भी तवज्जो नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने पार्टी से अलग राह चुनी.

भाजपा ज्वाइन कर लिया. दुमका से लोकसभा का टिकट भी ले लिया. सोशल मीडिया के जरिये अपनी भड़ास उतारते हुए कहा कि उसके पति के निधन के बाद उनके और उनके बच्चों के जीवन में जो बदलाव आया, वह किसी भयावह सपने से कम नहीं था. उन्हें बच्चों सहित उपेक्षित करने के साथ सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी अलग थलग कर दिया गया.

सीता के बाद अब अपनी ही पार्टी से लंबे समय से नाराज चल रहे विधायक लोबिन हेंब्रम ने बागी तेवर अपना लिया है. 10 अप्रैल को उन्होंने पार्टी में रहते ही राजमहल सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. वह भी तब जब झामुमो ने अपने वर्तमान सांसद विजय हांसदा को वहां से कैंडिडेट बनाया है.

लोबिन ने इसकी घोषणा करते हुए मीडिया से कहा था कि दुर्गा सोरेन के बाद जिस तरह उनके छोटे भाई हेमंत को सोरेन को उत्तराधिकारी बनाया गया, उसी तरह से हेमंत के जेल जाने के बाद बसंत को उत्तराधिकार मिलना चाहिये था. कल्पना को किसने उत्तराधिकारी बना दिया. आखिरकार पार्टी और परिवार में चल क्या रहा है. कौन लोग पार्टी और परिवार चला रहे हैं, यह बड़ा मुद्दा है. बड़ी बहु होने के नाते सीता को सरकार और संगठन में भी उचित जगह मिलनी चाहिये थी.

फ्रंटफुट पर कल्पना

सियासी गपशप की मानें तो अब हेमंत के इशारे पर कल्पना सोरेन ही अपनी पार्टी और संगठन को देखने लगी हैं. गांडेय उपचुनाव के लिए चुनावी मैदान में उतरने की भी तैयारी है. साथ ही वे लगातार पार्टी की बैठकों में शामिल हो रही हैं और पार्टी लीडरों को निर्देश दे रही हैं. पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश प्रभरी जीएस मीर, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, राजद विधायक और मंत्री सत्यानंद भोक्ता, बगोदर विधायक विनोद सिंह सहित अन्य नेताओं ने कल्पना सोरेन से लोकसभा चुनाव में सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर आपसी भेंट और चर्चा की थी. इस सीन में सीएम चंपाई सोरेन नहीं थे. इसे लेकर कई स्तरों पर कानाफूसी होती रही. इसी तरह से हाल के दिनों में पार्टी के स्तर से कुछ ऐसे कार्यक्रम हुए, जिसमें चंपाई की अनुपस्थिति को लेकर खूब चर्चाएं हुई हैं.

भाजपा ले रही मजे

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे लगातार सोरेन परिवार को लेकर सोशल मीडिया के जरिये सामने आ रहे हैं. उनका मानना है कि सीता के साथ गलत हुआ और अब वह सही जगह पर है. झामुमो की जो स्थिति है, उसमें हेमंत के भाई बसंत भी आगामी कुछ महीनों में पार्टी छोड़ देंगे. सीएम चंपाई सोरेन, विधायक मथुरा महतो जैसे पार्टी के नेताओं का अलग-अलग गुट बन जायेगा. अगले साल तक झामुमो पार्टी टूट जाएगी. नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी भी झामुमो को निशाने पर ले चुके हैं. कहा है कि टाइगर कहे जाने वाले चंपाई सोरेन को अब अपनी ही पार्टी में सम्मान नहीं मिल रहा. सारा लाइमलाइट मैडम कल्पना ले रही हैं. चंपाई को सर्कस टाइगर बनाया जा रहा है.

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