
Akshay/Pravin
Ranchi: DGP डीके पांडेय आज पुलिस सेवा से रिटायर हो रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद वो सुकून से जीवन बसर करें, इसके लिए वो एक आलीशान बंगला बनवा रहे हैं. बंगला 51 डिसमिल जमीन पर बन रहा है और जमीन उनकी पत्नी पूनम पांडेय के नाम पर है.
लेकिन गौर करने वाली बात है कि यह बंगला जिस जमीन पर तैयार हो रहा है, वो बंगला फर्जी तरीके से कब्जा की हुई जमीन पर तैयार हो रहा है. इसके साक्ष्य अंचल कार्यालय और रांची डीसी कार्यालय में मौजूद हैं.
ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी शीर्ष अधिकारियों को नहीं है, लेकिन बात उस हाउसिंग कॉलोनी की है, जहां डीजीपी साहब समेत करीब 25 आईपीएस अफसरों का बंगला बन रहा है.
जल्द ही न्यूज विंग उन सभी नामों को भी जनता के सामने लाएगा, जिन्होंने वहां फर्जी तरीके से जमीन कब्जा कर बंगला तैयार कराने की कवायद शुरू की है. न्यूज विंग लगातार इस खबर पर जनता को अपडेट कर रहा है. पाठकों के रुझान आने शुरू हो गए हैं.
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पहले कराया फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन
कांके पुल पार करते ही और रिंग रोड क्रॉस करते ही एक पुलिस पिकेट मिलेगा. वहीं से रास्ता खुलता है, पुलिस हाउसिंग कॉलोनी जाने का. चामा में बहने वाली जुमार नदी के किनारे यह कॉलोनी बनायी जा रही है. जिस खाता नंबर 87 के प्लॉट नंबर 1232 पर डीजीपी अपना बंगला तैयार कर रहे हैं. वो जीएम लैंड है. इसकी पुख्ता जानकारी अंचल कार्यालय से न्यूज विंग ने ली है. इस हाउसिंग कॉलोनी का ज्यादातर हिस्सा खाता नंबर 87 और 88 है. दोनों ही खाता जीएम लैंड है.

इसपर कब्जा करने के लिए एक सोची समझी चाल चली गयी. पहले जमीन का निबंधन कार्यालय से 20 जनवरी 2018 को रजिस्ट्री कराया गया. निबंधन में बताया गया है कि यह जमीन किसी अमोद कुमार से ली गयी है और वो बढ़ई जाति से आते हैं. जो सरासर फर्जी है.
पुलिस हाउसिंग कॉलोनी जिस मौजा में बन रहा है, वो चामा मौजा है. न्यूज विंग की टीम ने चामा गांव जाकर यह पता लगाया है कि वहां कोई बढ़ई जाति का परिवार रहता है कि नहीं, जवाब मिला नहीं. वैसे भी जमीन के कागजातों से साफतौर से 87 और 88 खाता जीएम लैंड है. ऐसे में यह जमीन किसी अमोद की हो ही नहीं सकती. तो सवाल कि कैसे इस जमीन की रजिस्ट्री हो गयी.
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फिर कराया फर्जी तरीके से म्यूटेशन
फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने के बाद अब बाधा थी, म्यूटेशन कराने की. लेकिन बाधा चुटकी बजाते ही दूर हो गयी. डीजीपी डीके पांडेय को पोस्ट और पावर का पूरा फायदा मिला. जो जमीन जीएम लैंड थी, उसे सीओ कार्यालय ने म्यूटेशन कर दिया. सीओ प्रभात कुमार से बात करने के लिए बार-बार उन्हें फोन किया जा रहा है.
कभी वो बैठक का हवाला दिलवा देते हैं, तो कभी फोन उठाना जरूरी नहीं समझते हैं. इस बीच सवाल यह उठता है कि कैसे सीओ कार्यालय ने म्यूटेशन कर दिया. क्या रांची के अपर समाहर्ता या उनसे बड़े अधिकारियों को इस गड़बड़झाले का पता नहीं चला, या पता चलने के बावजूद उन्होंने आंख पर पट्टी बांध ली.
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जानिए उन नामों को भी जिन्होंने कराया फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन
नीचे दिए गए नाम खाता नंबर 87 से जमीन खरीदने का दावा कर रहे हैं. बकायदा फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन कराकर उस जमीन को रैयती बना चुके हैं. जबकि यह खाता ही जीएम लैंड है. जो ना तो खरीदी जा सकती है और ना बेची जा सकती है.
इन नामों से सिस्टम में हुए एक बड़े घोटाले का खुलासा होता है.
1) अमोद कुमार, पिता राम नारायण शर्मा
2) पूनम पांडेय, पति डीके पांडेय
3) सुलभा सिंह, पति शशि शेखर
4) मंजूला प्रभा, पति धिरेंद्र कुमार सिंह
5) शोभा सिंह, पति किशोर चंद्रा
6) शिव शंकर प्रसाद शर्मा, पिता कमलेश्वर प्रसाद शर्मा
7) अंजना नारायण, पति कुमार सुधांकर नारायण
8) माधवी सिंह, शिव शंकर सिंह
9) ब्रीजेंद्र कुमार सिंह, चंद्रेश्वर सिंह
10) तलकेश्वर राम, जगलाल राम
11) उमरावती देवी, पति बर्मा दयाल
12) उमरावती देवी, पिता बर्मा दयाल
13) गायत्री देवी, त्रिपुरारी सिंह
14) रक्षिका सिंह, ब्रजेश कुमार सिंह
15) आशा देवी, अनिल कुमार सिंह
16) भावना मिश्रा, संजय कुमार मिश्रा
17) अनुपमा देवी, पिता श्याम दास सिंह
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