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झारखंड में नदियों को जोड़ने की योजना फाइलों में हुई बंद, सुदेश महतो के कार्यकाल में बनी थी योजना

14 करोड़ डीपीआर बनाने में हुए खर्च, हाल शिफर

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Ranchi :  झारखंड की नदियों को जोड़ने की महात्वाकांक्षी योजना फाइलों में बंद हो गयी है. तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो के कार्यकाल में नदियों को जोड़ने की योजना बनी थी. इसमें दक्षिणी कोयल बेसिन,  दामोदर-बराकर-सुवर्णरेखा नदी को जोड़ने और शंख-दक्षिण कोयल नदी को जोड़ने का भारी-भरकम प्लान  भी बनाया गया था. केंद्रीय जल आयोग को इन नदियों के अनुपयोगी जल को कृषि और अन्य कार्य में उपयोग में लाये जाने के लिए सलाहकार भी नियुक्त किया गया. सलाहकार कंपनी को यह जवाबदेही दी गयी कि नदियों के अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम को जोड़ने की तकनीकी और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाये. इसके लिए सरकार की तरफ से डीपीआर बनाने के लिए 14 करोड़ भी दिये गये. यह राशि भी बेकार हो गयी. नदियों को जोड़ने की बात तो दूर, नदियों का अधिक पानी जलाशयों तक पहुंचाने अथवा उसे संरक्षित करने की योजना भी धरी की धरी रह गयी. केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से तत्कालीन जल संसाधन मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने नदियों को जोड़ने की दिशा में समझौते भी किये. पर इसका अनुकूल असर नहीं हो पाया.

कौन-कौन से नदियों को जोड़ने की थी योजना

झारखंड सरकार की तरफ से दक्षिण कोयल नदी को सुवर्णरेखा बेसिन से जोड़ने की योजना बनायी गयी थी. इसमें यह कहा गया था कि दक्षिण कोयल बेसिन में 1281 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मनोहरपुर प्रखंड में अनुपयोगी रूप से पड़ा हुआ है. इसे सुवर्णरेखा बेसिन तक तजना नदी और चांडिल डैम के जरिये पहुंचाया जा सकता है. इन दोनों नदियों के बेसिन को जोड़ने में खरकई और संजय नदी का पानी भी लिया जायेगा. दूसरी योजना के तहत दामोदर-बराकर-सुवर्णरेखा नदी को जोड़ना था. इससे 493.4 एमसीएम पानी का बेहतर उपयोग किये जाने की बातें कही गयी थीं. लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि भी सिंचित किये जाने की सरकार ने योजना बनायी थी. बेसिन का पानी बालपहाड़ी डैम तक लाकर उसे सुवर्णरेखा नदी में डालना था. दामोदर नदी का पानी बेरमो और सुवर्णरेखा नदी का पानी मुरी तक लाकर मिलाना था. तीसरी योजना में शंख नदी और दक्षिण कोयल नदी को जोड़ने की योजना बनायी गयी थी. इस बेसिन का 408 एमसीएम पानी लाया जायेगा. शंख नदी को गुमला में जोड़ने की योजना की है.

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