
Ranchi: राज्य में कुपोषण की मार लगातार बढ़ती जा रही है. पोषण सुरक्षा मामले में झारखंड देश में लो परफोरमेंस करने वाले राज्यों में शामिल है. झारखंड का स्थान भारत में तीसरे स्थान पर है. सरकारी सर्वे में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य में अभी भी पांच वर्ष से कम उम्र के 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिक हैं, जिनमें खून की कमी पायी जाती है. झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के आंकड़ों के मुताबिक पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में 45 प्रतिशत मामले स्टंटिंग (बौनापन) के सामने आए हैं.
सरकार ने माना- लोगों में जागरूकता की है कमी
इस तरह के आंकड़े कहीं ना कहीं सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है. साथ ही इससे निपटने में खुद सरकार का मानना है कि अभी पोषण सुरक्षा के मामले में उतनी सफलता नहीं मिल पा रही है, जितनी की जरूरत है. लोगों में जागरूकता की कमी इसका मुख्य कारण है और सरकारी सुविधाओं का लाभ भी सदूर इलाकों के लोगों के पास नहीं पहुंच पाता है, जिससे भी उन्हें योजनाओं का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पाता है.
दुबलापन और कम वजन का प्रतिशत अधिक
झारखंड में कुपोषण बढ़ने की सबसे बड़ी समस्या बच्चों के पर्याप्त पोषक तत्वों का न मिलना है. साथ ही गर्भवति महिलाओं में भी पौष्टिक भोजन नहीं लेने सबसे बड़ी कमजोरी है. सर्वे में पाया गया है कि राज्य के दुबलापन और कम वजन के बच्चों की संख्या अधिक है. दुबलापन में 40 प्रतिशत से अधिक और कम वजन में 49 प्रतिशत से अधिक संख्या ऐसे बच्चों की है. हांलाकि सरकारी दावों में यह आंकड़ा लगातार कम होता जा रहा है.
पोषण की जानकारी दी जा रही है गांवों में
सूबे के सभी 24 जिलों में बच्चों और मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई जागरूक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. हाल में ही हुए पोषण माह में सरकार की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए , जिसमें पौष्टिक भोजन की जरूरत और इसके फायदों के बारे में बताया गया. इसके अलावे मातृ स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखा जा रहा है और जरूरत पड़ने पर मातृ स्वास्थ्य को लेकर लगातार जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि शिशु मृत्यु दर झारखंड में कम हो सके.
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