
Ranchi : राज्यपाल रमेश बैस ने आज झारखंड राज्य अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रमुखों के साथ बैठक की. इस दौरान उन्होंने सभी लोक उपक्रमों से उनके वित्तीय स्थिति अर्थात लाभ-हानि की जानकारी प्राप्त करते हुये कहा कि अपनी बेहतर कार्यशैली से विकास की गति की दिशा में ध्यान दें और व्याप्त समस्याओं का हल करें. उन्होंने कहा कि वे राज्य के विकास हेतु प्रातिबद्ध हैं और राज्यहित में विभिन्न समस्याओं से अवगत होने हेतु सदा उपलब्ध हैं.
कोई भी लोक उपक्रम अपने यहां व्याप्त विभिन्न परेशानियों से अवगत करा सकते हैं. राज्यहित में उन समस्याओं के यथोचित निदान हेतु सदा प्रयास करूंगा. आज की बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव शैलेश कुमार सिंह, निदेशक, उद्योग विभाग मौजूद थे.
इसे भी पढ़ें:दीपक प्रकाश ने केंद्र सरकार से की झारखंड में NCLE का सर्किट बेंच खोलने की मांग
जनता की आवश्यकता के अनुरूप सीएसआर के हों काम
राज्यपाल रमेश बैस ने औद्योगिक प्रतिष्ठान व सार्वजनिक लोक उपक्रमों के द्वारा सीएसआर के तहत किये जा रहे कार्य की समीक्षा करते हुये कहा कि हमारे औद्योगिक प्रतिष्ठान व सार्वजनिक लोक उपक्रम सीएसआर के तहत व्यय किये जाने वाली राशि को अनुपयोगी कार्य में न लगायें, बल्कि जनहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये खर्च करें. उन्होंने कोरोना महामारी काल में मानवहित में विभिन्न उपक्रमों द्वारा किये गये कार्यों की भी जानकारी प्राप्त की.
उन्होंने उक्त अवसर पर एचईसी से घाटे में जाने के कारणों की जानकारी ली. एचईसी ने बताया कि यह प्रतिष्ठान समय के अनुरूप आधुनिकीकरण को नहीं अपना पाया. उनके पास मौजूद मशीन अत्यंत ही पुरानी हैं.

अभी संस्थान के पास 1700 करोड़ का ऑर्डर है जिसमें न्यूक्लियर क्षेत्र में 300 करोड़ से अधिक का ऑर्डर है. एचईसी को यदि वित्तीय सहायता मिल जाय तो आत्मनिर्भर भारत के क्षेत्र में बड़ा कदम होगा.
इसे भी पढ़ें:विधानसभा सत्र : राज्य में 73 प्रतिशत आरक्षण देने पर सरकार कर रही विचार, गठित होगी उपसमिति
इस उपक्रम को 3 हजार करोड़ देने हेतु सरकार से आग्रह किया गया लगभग एक हजार एकड़ से अधिक अनुपयोगी भूमि में से लगभग 200 एकड़ भूमि विक्रय करने की अनुमति दी जाय ताकि यह समय के अनुरूप आधुनिक मशीन से लैस होकर राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें.
राज्यपाल ने विभिन्न सार्वजनिक लोक उपक्रमों की भूमि को भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने की गतिविधियों की जानकारी लेते हुये कहा कि इस प्रकार की समस्याओं का समाधान राज्य सरकार व सम्बद्ध जिला प्रशासन को करना चाहिये. क्योंकि इससे न सिर्फ इन उपक्रमों की उत्पादकता प्रभावित ही नहीं होती बल्कि इनके द्वारा राज्य के विकास में भी व्यवधान उत्पन्न हो रही हैं.
उन्होंने कहा कि जब ये उपक्रम राज्य को इतना कुछ देते हैं तो राज्य सरकार को भी इनकी समस्याओं की दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है.
इसे भी पढ़ें:NEWSWING ROUNDUP: 22 DECEMBER
इन कंपनियों के प्रमुख से हुई बात
- भारत कोकिंग कोल लिमिटेड
- सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड
- ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड
- सी.एम.पी.डी.आई.
- हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड
- मेकॉन लिमिटेड
- यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
- हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
- दामोदर वैल्ली कॉर्पोरेशन
- नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
- बी.ई.एम.एल. लिमिटेड
- एनटीपीसी लिमिटेड
- स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड
- बोकारो स्टील प्लांट
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कोल मैनेजमेंट
इसे भी पढ़ें:बिहार में महिलाओं की मांग पर शराब बंदी लागू की गयी : नीतीश कुमार




