
Patna: पटना हाईकोर्ट ने बिहार के चर्चित गर्भाशय घोटाले के मामले पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को सीबीआई को पार्टी बनाने का आदेश दिया. जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह और डा अंशुमान की खंडपीठ ने वेटरन फोरम द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जा सकती है.
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि सबसे पहले ये मामला मानवाधिकार आयोग के समक्ष 2012 में लाया गया था. 2017 में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका वेटरन फोरम ने दायर किया गया था.
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बिना सहमति के निकाला गया गर्भाशय, पुरुषों का भी आपरेशन
इसमें ये आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का गलत लाभ उठाने के लिए बिहार के विभिन्न अस्पतालों/डॉक्टरों द्वारा बड़ी तादाद में बगैर महिलाओं की सहमति के ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल लिए गए. बीमा राशि लेने के चक्कर में दर्जनों पुरुषों का भी आपरेशन कर दिया गया.
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इस मामला के खुलासा होने के बाद मानवाधिकार आयोग ने 30 अगस्त,2012 को स्वयं संज्ञान लिया था आयोग ने 2015 में राज्य सरकार व अनुसन्धान एजेंसी को विस्तृत जानकारी देने को कहा था. इसमें कितने ओप्रेशन किये गए और कितनी महिलाओं के उनकी सहमति के बगैर उनके गर्भाशय निकाले गए और उनकी उम्र कितनी थी. पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का भी ब्यौरा माँगा गया था.
लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. मानवाधिकार आयोग और पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी क्षतिपूर्ति नहीं दिया गया है. साथ ही सार्वजनिक धन के वापसी के लिए भी अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. इस मामलें पर अगली सुनवाई 11 जुलाई, 2022 को होगी.




