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पारा शिक्षकों ने की भाजपा प्रवक्‍ता के बयान की निंदा, दी ओपन डिबेट की चुनौती

कहा- पारा शिक्षकों के हित में उठाये गये कदम भ्रामक और तथ्यहीन

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Ranchi: पारा शिक्षकों का संघर्ष और तेज होते जा रहा है. भाजपा प्रवक्ता की ओर से प्रेस वार्ता कर सरकार की ओर से पारा शिक्षकों को दी जाने वाली सुविधाओं को हितकार बताया, लेकिन पारा शिक्षक सरकार और पार्टी के लिए फैसले पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि सरकार की ओर से पारा शिक्षकों के हित में उठाये गये कदम भ्रामक और तथ्यहीन हैं. मोर्चा की ओर से कहा गया है कि भाजपा प्रवक्ता की ओर से भले ही कार्मिक सचिव, शिक्षा सचिव और राज्य परियोजना निदेशक को पारा शिक्षकों के लिए हितकर कदम बताया जा रहा हो, लेकिन जिन अधिकारों की बात भाजपा प्रवक्ता ने की है उनके प्रस्ताव पूर्व में ही बन गये हैं. अपना पक्ष रखते हुए मोर्चा ने कहा कि महिला पारा शिक्षिकाओं को मातृत्व एवं विशेषावकाश देने की बात जो भाजपा ने की है, वो गीताश्री उरांव के साथ वार्ता के दौरान ही सहमति बनी थी, इसमें वर्तमान सरकार का कोई महत्व नहीं है.

10 प्रतिशत वृद्धि 2018 में रूका

2015 में पारा शिक्षकों की ओर से घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन किया गया था, इस दौरान शिक्षा मंत्री नीरा यादव के साथ हुई वार्ता में प्रति वर्ष मानदेय में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात की गयी थी. 2015 में इसे 25 प्रतिशत और प्रतिवर्ष दस प्रतिशत वृद्धि पर पारा शिक्षक सहमत हुए थे. 2016 और 2017 में पारा शिक्षकों को वृद्धि का दस प्रतिशत तो दिया गया, लेकिन 2018 में वृद्धि रोक दी गयी, वहीं 25 और दस प्रतिशत मिला के जो 35 प्रतिशत प्रत्येक साल देने की बात हुई थी वो राशि भी पारा शिक्षकों को नहीं मिला.

गलत आंकड़े किये जा रहे प्रस्तुत

मोर्चा के संयोजक संजय दूबे ने कहा कि टेट पास पारा शिक्षकों का मानदेय वृद्धि 20 प्रतिशत करने की बिलकुल तथ्यहीन है. उन्होंने बताया कि राज्य में कक्षा एक से पांचवी तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों को 16.55 मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव है. वहीं कक्षा छह से आठवीं तक के शिक्षकों को 18.06 प्रतिशत मानदेय बढ़ाये जाने का प्रस्ताव है.

भाजपा सरकार का कोई योगदान नहीं

राज्य के प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव किया गया है. जिसमें वर्तमान भाजपा सरकार का कोई योगदान नहीं है. संजय ने कहा कि 50 प्रतिशत आरक्षण पारा शिक्षकों ने साल 2009 में लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया था, जिस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू थी. संजय ने कहा कि पारा शिक्षक कल्याण कोष में दस करोड़ रखने की बात हाथी दांत के समान है. दस करोड़ का ब्याज ही पारा शिक्षकों के हितों के लिये इस्तेमाल किया जायेगा.

ओपन डिबेट करायें सरकार, बरगला रहें अधिकारी

मोर्चा ने कहा कि पारा शिक्षकों के स्थायीकरण में अधिकारी तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर मुख्यमंत्री को बरगला रहे हैं. ऐसे में सरकार को चाहिए कि जानकार मंत्री, विधायक, महाधिवक्ता की उपस्थिति में पारा शिक्षकों और अधिकारी, मंत्री के बीच ओपन डिबेट करायें, हकीकत खुद सामने आ जायेगी.

सरकारी गीदड़ भभकी से नहीं डरेंगे शिक्षक

संजय ने कहा कि पारा शिक्षकों का हड़ताल जारी रहेगा. सरकारी गीदड़ भभकी से पारा शिक्षक नहीं डरने वाले हैं. आगे की रणनीति की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 22 नवंबर को पलामू प्रमंडल के पारा शिक्षक सपरिवार स्थानीय थाना में गिरफ्तारी देंगे, अन्य चार प्रमंडलों के पारा शिक्षक आंदोलन जारी रखते हुए 23 नवंबर को धरना आयोजित करेंगे, 25 नवंबर को राज्य के सभी सत्ताधारी विधायकों और सासंदों के आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन घेरा डालो डेरा डालो कार्यक्रम किया जायेगा.

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