Ranchi

सरकार के आश्वासन से आक्रोशित पंचायत स्वयं सेवक, ग्राम स्तर पर कर रहे अन्य पार्टियों के लिये कार्य

Ranchi: पंचायत स्वयं सेवकों की नियुक्ति प्रोत्साहन राशि पर की गयी है. कार्य के बदले इन्हें सरकार की ओर से तय की गयी प्रोत्साहन राशि दी जाती है. जो न्यूनतम दस रूपये से लेकर 12 सौ रूपये तक है. लेकिन राज्य के कई पंचायत स्वयं सेवकों को पिछले दो से तीन साल से सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी नहीं दी गयी है.

साल 2016 में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से इन पंचायत स्वयं सेवकों की नियुक्ति की गयी. अप्रैल माह में 30 दिनों के आंदोलन के बाद पंचायत स्वयं सेवकों ने मुख्यमंत्री से डेढ़ घंटे तक वार्ता की. जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि दस दिनों में पंचायत स्वयं सेवकों का बकाया भुगतान कर दिया जायेगा.

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इसके बावजूद भी कुछ ऐसे भी जिले हैं जहां स्वयं सेवकों को प्रोत्साहन राशि तो दी गयी, लेकिन जिले के कुछ ब्लॉक्स को छोड़ दिया गया. वहीं पाकुड़, गढ़वा, लातेहार जैसे जिले हैं जहां पिछले दो से तीन सालों से स्वयं सेवकों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं दी गयी है.

प्रोत्साहन राशि की कठिनाई को ले बनानी थी कमेटी

मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से कई बार पंचायत स्वयं सेवकों के प्रोत्साहन राशि में आ रही कठिनाईयों के लिये कमेटी के गठन की बात की गयी. लेकिन अभी तक विभाग और सरकार की ओर से इस पर कोई पहल नहीं की गयी.

अप्रैल में मुख्यमंत्री ने भी पंचायत स्वयं सेवकों के लिये कमेटी गठित करने की बात कही थी. जिससे बकाया प्रोत्साहन राशि की कठिनाईयों को दूर किया जा सके. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. 26 सिंतबर को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल ने कहा कमेटी गठित करने की बात कहीं. लेकिन कोई विभागीय पहल नहीं की गयी.

सरकारी आश्वासन में तोड़ा आंदोलन, अब है असंतोष

गौरतलब है कि सिंतबर में पंचायत स्वयं सेवकों की ओर से सात दिनों का आंदोलन किया गया. जिसके बाद 24 सिंतबर को स्वयं सेवकों की वार्ता मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव से हुई उनके आश्वासन पर आंदोलन समाप्त किया गया.

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वार्ता के दौरान स्वयं सेवकों को आश्वासन दिया गया कि इनकी समस्या का समाधान किया जायेगा. उसी दौरान राष्ट्रपति का दौरा भी राज्य में था. जिसके कारण संघ ने आंदोलन समाप्त कर दिया. लेकिन अब स्वयं सेवकों के बीच असंतोष है. क्योंकि सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया. आचार संहिता भी लागू होने में कुछ दिन ही है. हालांकि इस वार्ता में सुनील वर्णवाल ने स्पष्ट कहा था कि मानदेय तय सीएम ही कर सकते हैं. प्रशासनिक कार्यों में वे सहयोग कर सकते हैं.

ग्राम स्तर पर अन्य पार्टियों के लिये काम कर रहें

इस संबंध में पंचायत स्वयं सेवक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष पावेल कुमार का कहना है कि मौजूदा सरकार की ओर से लगभग तीन-चार बार बातचीत की गयी. लेकिन पंचायत स्वयंसेवकों की समस्या का समाधान नहीं किया गया. ग्राम स्तर पर जानकारी मिली है कि कुछ अन्य पार्टियों के लिये पंचायत स्वयं सेवकों ने कार्य करना शुरू कर दिया है. क्योंकि स्वयं सेवकों के कोई विकल्प नहीं है.

नाम न लिखने की शर्त पर कुछ अन्य पंचायत स्वयं सेवकों ने बताया कि अब पंचायत स्तर पर स्वयं सेवक चुनाव के पूर्व अन्य पार्टियों के साथ (मुख्य रूप से जेएमएम के लिये) कार्य कर रहे है. कई बार मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत स्वयं सेवकों को इतना कार्य दिया जायेगा कि जिससे उनकी आमदनी अच्छी हो जायेगी, लेकिन ये भी नहीं किया गया. राज्य में पंचायत स्वयं सेवकों की संख्या लगभग 18 हजार है.

इन-इन कार्यों की बकाया है राशि

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर तीन माह में बनाये जाने पर 12 सौ रूपये प्रोत्साहन राशि. लेकिन जिन पंचायत स्वयं सेवकों को बकाया दिया गया, उन्होनें बताया कि एक आवास पर 12 सौ की जगह पांच सौ मिले हैं.

राशन कार्ड बनाने के दस रूपये, पारिवारिक सर्वेक्षण में प्रति घर पचास रूपये, विशेष ग्राम सभा आयोजित करने पर एक हजार दिये जाते है. कुछ पंचायत स्वयं सेवक तो ऐसे भी है जिनका हजार से लाखों तक बकाया है.

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