
Palamu : राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था एक अबूझ पहेली बन गयी है. जरूरतमंदों को उचित इलाज और परार्मश बिना पैसे के उपल्बध होता नही दिख रहा है. सरकारी सुविधाओं का हाल बेहाल है. सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज को आते हैं तो बिना उपचार या बिना पूरा उपचार किये डिस्चार्ज कर दिया जाता है.
कई बार बीमार लोगों को एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराया जाता. मामला पलामू जिला के मनातु प्रखंड स्थित डूमरी पंचायत दलदलिया, सिकनी (फटरिया टोला), केदला (कोहबरिया टोला) का है. जहां आदिम जनजाति परहिया समुदाय के निवासी सतेंद्र परहिया, पिता- चलकर परहिया, सहित 6 लोग टीवी रोग से पीड़ित हैं. इन सभी के मुंह से रक्त आ रहा है.
इसे भी पढ़ेंः कोरोना वायरस के साइड इफेक्ट : लॉकडाउन में ऑनलाइन होगी डोपिंग मामलों की सुनवाई – नाडा महानिदेशक
बिना पूरा इलाज किये अस्पताल से दे दी जाती है छुट्टी

मनातु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से इन सभी रोगियों को अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में सदर अस्पताल डाल्टनगंज भेज दिया गया था. यहां से दो दिन के उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था. बीमारी की हालत में ये लोग पैदल डाल्टेनगंज अपने गांव आ गये. अभी उनकी स्थित की गंभीर हो गयी है.
क्या कहते है सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मनातु के चिकित्सक
इस बाबत न्यूजविंग की ओर से पूछे जाने पर मनातु के चिकित्सक अमित आजाद कहते हैं, करीब 20 दिन पहले डुमरी पंचायत के तीन लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया था. सभी आदिम जनजाति से थे. वहां उनका इलाज हुआ. आज हमने एक टीम गांव भेजा है. उस समय टीवी रोग से ग्रसित तीन लोग वहां पाये थे.
लुप्त होने के कगार पर है आदिम जनजाति समुदाय
आदिम जनजाति समुदाय विलुप्त होने के कगार पर है. सरकार इन्हें विशेष सुविधा और सरकारी योजनाओं से जोड़ कर संरक्षण की बात कहती है. मगर वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था उन्हें मरने लिए छोड़ दे रही है.
मनातु प्रखंड में करीब 400 परिवार आदिम जनजाति समुदाय के लोग हैं. जिनमें 150 परिवारों का राशन कार्ड नहीं है. पीडीएस सूची के अनुसार मात्र 266 पीवीटीजी का ही राशन कार्ड है. जबकि आवंटन 441 का है. ऐसे में सरकारी सुविधा की पहुंच आज तक जरूरतमंदों तक नहीं हो सकी है.
इसे भी पढ़ें : #Bihar में कोरोना का कहरः संक्रमितों की संख्या हुई 536, गया को रेड जोन में रखने पर नीतीश सरकार ने जताई आपत्ति




