Palamu

पलामू : विकास से कोसों दूर है सिंहटूटा गांव,  नदी-नाले के पानी से बुझती है ग्रामीणों की प्यास

Palamu : जिले में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं. पर यहां ऐसे भी इलाके हैं जहां आजादी के बाद से विकास योजनाएं ढंग से नहीं पहुंची. नतीजा ऐसे क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से अभी तक वंचित हैं. ऐसे ही इलाकों में पलामू जिले के मनातू प्रखंड के सुदूरवर्ती और घोर नक्सल प्रभावित सिंहटूटा गांव है. यहां पेयजल का कोई प्रबंध नहीं होने के कारण ग्रामीण बारिश के इस मौसम में भी दूषित नदी और नाले का पानी पीने को मजबूर हैं.

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उग्रवाद प्रभावित इलाका है सिंहटूटा गांव

मनातू प्रखंड के रंगिया पंचायत का सिंहटूटा गांव विकास से कोसों दूर है.यह इलाका अति उग्रवाद प्रभावित भी है. गांव पूरी तरह से मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव में जाने के लिए सड़क नहीं है. लोग नदी-नाले के दूषित पानी से ही प्यास बुझाने को विवश हैं.

यह गांव मनातू प्रखंड मुख्यालय से 20 व जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर है. सिंहटूटा ऐसा क्षेत्र है जहां सालों भर लोगों को समस्या से जूझना पड़ता है. इस गांव की आबादी करीब 400 से अधिक है. गांव में पानी का कोई स्रोत नहीं होने के कारण ग्रामीण नदी-नाले का पानी पीते हैं. सड़क नहीं होने के कारण लोग चार पहाड़ व पांच नाला पार कर गांव आते-जाते हैं.

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प्राथमिक विद्यालय हमेशा रहता है बंद

सड़क के अभाव में लोग खाटी (खटिया) पर टांग कर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं. गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. बिजली की बात की जाए तो आज भी लोग ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. गांव में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन हमेशा बंद रहता है. पांचवी कक्षा के बाद यहां के बच्चों को उपर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गांव से बाहर काफी दूर जाना पड़ता है. इसी वजह से गांव के लोग अपने बच्चों को पांचवीं के बाद पढ़ाई छुड़वा देते हैं. गांव के अधिकांश लोग निरक्षर हैं. ग्रामीण परमेश्वर सिंह, संगीता देवी, विजय सिंह, संध्या देवी समेत अन्य ने बताय़ा कि सरकार द्वारा संचालित एक भी योजना ग्राम में नहीं है. गांव घनघोर जंगल में बसा है. ग्रामीणों ने कई बार पंचायत के मुखिया, प्रखंड विकास पदाधिकारी से गांव में हैंडपंप लगाने, गांव तक जाने के लिए सड़क बनवाने की मांग की. मगर ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन मिला. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में एक ही हैंडपंप नहीं होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

पक्की सड़क बनाने के लिए प्रशासन से लगायी गुहार

रंगिया पंचायत के मुखिया रामचंद्र भुईया ने बताया कि सिंहटूटा गांव जाने तक सड़क नहीं होने के कारण गांव में हैंडपंप नहीं लगाया जा सका है, लेकिन एक जल मीनार लग गया है. गांव तक सड़क बनाने के लिए टेंडर सड़क बनाया जा सकता है. कई बार सिंहटूटा गांव तक सड़क बनाने की मांग जिला प्रशासन से कर चुके हैं. लेकिन अबतक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है.

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