
Palamu: पलामू जिले के सतबरवा में 25 हजार क्विंटल से ज्यादा धान बारिश के पानी में भीग कर पूरी तरीके से बर्बाद हो गया. धान एफसीआई ने किसानों से खरीदी थी. धान के बोरे खुले आसमान के नीचे मैदान में रखे गये थे.
यास तूफान के प्रभाव से हुई बारिश के चलते हजारों क्विंटल धान भीग गया. इसमें एफसीआई की लापरवाही सामने आ गई है. धान गोदाम के बाहर खुले आसमान के नीचे 40 हजार बोरों में रखे गये थे. सबसे ज्यादा नुकसान एफसीआई के साथ-साथ किसानों को भी हुआ है.
सतबरवा में 40 हजार धान के बोरे भीगे
जिले के सतबरवा के छात्रावास परिसर में बने पैक्स में रखे 40 हजार धान के बोरे भीग गये हैं. प्रत्येक बोरे में 40 किलो धान भर कर रखा हुआ था. किसानों से धान खरीदने के बाद गोदाम के अभाव में उसे खुले आसमान के नीचे रखा गया था. धान के बोरों को सुरक्षित रखने में कोई व्यवस्था नहीं की गई थी. बोरियों को ढक कर रखने के लिए त्रिपाल या प्लास्टिक तक नहीं लगाया गया था.
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एफसीआई की उदासीनता से हुआ भारी नुकसानः
यास चक्रवात के दौरान तीन दिनों तक बारिश हुई. एक सप्ताह पहले हुई बारिश में भी धान के बोरे को खुले आसमान के नीचे रखे हुए थे. पूरे दिन धान के बोरे भींगते रहे. बताया जाता है कि किसानों से धान खरीदने के बाद एफसीआई द्वारा उसे सुरक्षित रखने और रांची के नगड़ी स्थित गोदाम ले जाने में तत्परता नहीं दिखाये जाने के कारण नुकसान हुआ. जानकारी मिली है कि पिछले चार-पांच महीने पहले किसानों से धान खरीदने के बाद उसे ले जाने में उदासीनता बरती गई. नतीजा बारिश के पानी में भींगकर धान अंकुरित होने लगे हैं. मैदान में धान के बोरे रखे जगह पर जल जमाव भी नुकसान का कारण बना रहा.
हमेशा रहता है गोदाम का अभावः
एफसीआई का अपना गोदाम नहीं होने के चलते किसानों से क्रय किए गए धान को ट्रेनिंग कॉलेज के छात्रावास और खुले आसमान के नीचे खेल मैदान में रखा गया था. माप तौल करने और हटाने के कार्य में लगे मोटिया मजदूरों ने बताया कि करीब 25 हजार क्विंटल धान बारिश में भीग जाने के कारण खराब हो गया है. एफसीआई को हमेशा से धान खरीदने के बाद गोदाम का अभाव झेलना पड़ा है.
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सामाजिक कार्यकर्ता सह पोंची के किसान आशीष सिन्हा ने बताया कि क्रय केंद्र का धान खुले आसमान के नीचे पांच माह से रखा गया है. यहां तक कि धान अंकुरित होकर जमीन से बाहर निकल आया है. वहां पर जलजमाव की स्थिति बनी हुई है. राज्य सरकार का अपना गोदाम होता तो करोड़ों रुपए का नुकसान होने से बचाया जा सकता था.
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धान उठाव में देरी की वजह से धान भीगाः गोदाम प्रबंधक
एफसीआई के गोदाम प्रबंधक श्यामलाल उरांव ने धान भीग जाने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि अनाज रखने का अपना गोदाम होता तब धान को भीगने से बचाया जा सकता था. धान उठाव में देरी भी धान भींगने का कारण बना.
अचानक हुई बारिश के कारण सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध नहीं किए गए. हालांकि इसके बाद भी त्रिपाल और प्लास्टिक के द्वारा ढक दिए जाने से काफी हद धान को बचाया जा सका है. नीचे वाले हिस्से में रखे गए बोरे के धान को नुकसान पहुंचा है.
बताया गया कि धान भींग जाने के चलते करोड़ोंं रुपये का नुकसान सरकार को हुआ है. लॉकडाउन और समय पर ढुलाई की व्यवस्था नहीं होना भी इसका कारण बना.
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