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झारखंड विधानसभा चुनाव: पीएम मोदी का चुनावी शंखनाद, ट्राइबल क्लास पर फोकस

Principal Correspondent

Ranchi: जमशेदपुर में रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी आए. 6 वंदे भारत ट्रेन के अलावा आवास योजनाओं (ग्रामीण) की सौगात झारखंड को भी दी. पर उनके इस कार्यक्रम को महज एक सरकारी कार्यक्रम के तौर पर ही नहीं देखा जा रहा. गोपाल मैदान, जमशेदपुर में जनसभा को उन्होंने संबोधित भी किया. पूर्व सीएम चंपाई सोरेन और झामुमो की पूर्व विधायक सीता सोरेन को अपमानित किए जाने का मसला उठाया. कांग्रेस को आदिवासी विरोधी बताया. रोहिंग्या घुसपैठिए के साथ कांग्रेस के खड़े होने की बात कही. साथ ही कहा कि झामुमो में कांग्रेस का भूत घुस गया है. इससे अगली पार्टी का भी इकलौता एजेंडा तुष्टीकरण ही बन जाता है. राज्य में सत्ता परिवर्तन और झारखंड के विकास के लिए राज्य के लोगों से उन्होंने समर्थन मांगा. उनका पूरा भाषण राजनीतिक और चुनावी रंग में रंगा हुआ दिखा. ऐसे में कहा जा सकता है कि मोदी ने आगामी कुछ माह में होनेवाले विधानसभा चुनाव को लेकर जमशेदपुर से चुनावी शंखनाद कर दिया है.

झारखंड से दिखाया जुड़ाव

जब निर्धारित प्रोग्राम के मुताबिक नरेंद्र मोदी रांची आए तो उस समय बारिश के असल के कारण हेलिकॉप्टर से जमशेदपुर नहीं जा सके. रांची से लेकर जमशेदपुर तक खराब मौसम और बारिश ने जमशेदपुर जाने से मोदी को रोकने की पूरी कोशिश की. पर मोदी भी जिद्दी निकले. उन्होंने कहा भी कि जनता जब सुबह से ही मेरे लिए इतनी बारिश में आ सकती है तो मैं उनके लिए क्यों नहीं जा सकता. सत्ता तो जनता के लिए ही है. जनता ने ही पीएम बनाया है. इसके बाद खराब बारिश और मौसम के बावजूद वे सड़क मार्ग से ही जमशेदपुर के गोपाल मैदान पहुंचे. वहां हजारों की भीड़ बारिश में भी उनको सुनने को बेताब थी. मोदी ने वहां भी कहा कि बारिश कितनी ही तेज क्यों ना हो, रुकावटें कितनी भी ज्यादा क्यों ना हों, लेकिन कोई भी रुकावट मुझे आपसे अलग नहीं कर सकती. मैं आपके दर्शन किए बिना वापस नहीं जा सकता था, सो सड़क मार्ग से ही यहां पहुंच गया. कोल्हान की भूमि से प्रचार का आगाज करते उन्होंने झामुमो-कांग्रेस-राजद को झारखंड का तीन सबसे बड़े दुश्मन बताया. मोदी ने अपने भाषण में झारखंड से अपना लगाव और आदिवासियों के विकास के लिए किए गए कार्यों की चर्चा की. कहा कि भाजपा ने झारखंड बनाया.

आदिवासियों के विकास के लिए अलग मंत्रालय बनाया. कई नई योजनाएं शुरू की. अब उनके गांव तक अधिकारी पहुंचकर उनकी समस्याएं जान रहे और उसका निदान कर रहे हैं. भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को आदिवासी जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया. एक आदिवासी महिला को पहली बार देश का राष्ट्रपति बनाया. भाजपा चाहती है कि आदिवासी, गरीब, दलित, पिछड़ा, किसान और युवाओं का विकास हो. देश की प्राथमिकता बदल गई हैं और अब पूरा फोकस इन्हीं वर्गों पर है. उन्होंने संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठियों और आदिवासियों की घटती जनसंख्या व तुष्टिकरण की राजनीति पर भी प्रहार किया. झारखंड मुक्ति मोर्चा में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन के अपमान का भी मुद्दा उठाया. कहा कि चंपाई सोरेन एक गरीब आदिवासी हैं. समाज के बड़े नेता हैं. फिर इन्हें अपमानित कर मुख्यमंत्री से क्यों हटाया गया. चंपई सोरेन के अपमान से पूरा आदिवासी समाज दुखी है. समय आने पर वह बदला लेने को तैयार है.

मोदी ने आदिवासियों को विश्वास में लेने की पूरी कोशिश की. उनके लिए किए जा रहे काम का उल्लेख किया. झारखंड मुक्ति मोर्चा, भ्रष्टाचार और सरकार के झूठे वादे की याद दिलाते हुए कड़ा प्रहार कर विधानसभा चुनाव में समर्थन मांगा. इसके साथ ही मोदी ने झारखंड को बड़ी सौगात दी. एक साथ छह वंदे भारत ट्रेनों का शुभारंभ सहित कई योजनाएं भी राज्य को दी. सभी 6 वंदे भारत ट्रेनें झारखंड से ही होकर गुजरेंगी. ये ट्रेनें नया अध्याय लिखेंगी. देश में अब तक किसी राज्य को एक साथ छह वंदे भारत नहीं मिली है. 7 हजार करोड़ रुपए झारखंड में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को मंजूर किए. राज्य के 50 से अधिक रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प भी होगा. राज्य के लिए एक लाख तेरह हजार पीएम आवास स्वीकृत किए गए.

चंपाई ने भाजपा के लिए मांगा सपोर्ट

मोदी के साथ चंपाई ने भी झारखंड में आदिवासियों के हक-अधिकार को लेकर बात उठाई. कहा कि भाजपा ही ट्राइबल क्लास के लिए अभी चिंता करती रही है और वही झारखंड को बचा सकती है. यहां आदिवासियों का विकास नहीं हुआ. बांग्लादेशी यहां काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. इन्हें रोकने के लिए सिर्फ भाजपा ही तैयार है. आनेवाले चुनाव में झारखंड में भाजपा की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, मोदी जानते हैं कि झारखंड में सत्ता में वापसी के लिए आदिवासी समाज का समर्थन जरूरी है. इसलिए उन्होंने जमशेदपुर में इस पर खूब फोकस किया, आदिवासियों की नब्ज पर हाथ रखा. मंच पर चंपाई सोरेन और उनके बेटे बाबूलाल सोरेन सहित अन्य आदिवासी नेताओं से भी आत्मीय मुलाकात की. जनता निराश न हो, गलत मैसेज न जाए. इसलिए उन्होंने भारी बारिश के बावजूद जमशेदपुर जाने का फैसला लिया. झारखंड को रेलवे, आवास योजनाओं की सौगात दी. जनसमर्थन मांगा. पूर्व सीएम चंपाई ने भी ट्राइबल क्लास को भाजपा के साथ आने की अपील की. अब इन सब प्रयासों का क्या नतीजा रहता है, यह चुनाव बाद ही पता लगेगा.

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