
Palamu: मुगलसराय और धनबाद रेल मंडल के बीच सोननगर से बरकाकाना तक तीसरी लाइन बिछायी जा रही है.
तीसरी लाइन बिछाने का जहां कार्य चल रहा है, वहीं इसके लिए क्वार्टर सहित अन्य आधारभूत संरचना के विकास के लिए कार्य तेज किया गया है.
रेलवे की जमीन से अतिक्रमण भी हटाया जा रहा है. इसी कड़ी में सोमवार को डालटनगंज रेलवे स्टेशन से सटे रेड़मा में 13 लकड़ी के टाल हटाने की मुहिम तेज की गयी.
पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी के हस्तक्षेप से रुका अभियान
रेलवे अधिकारियों नॉ पुलिस फोर्स और आरपीएफ जवानों के साथ रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम शुरू की. उन्होंने डालटनगंज रेलवे स्टेशन के आस-पास वर्षों से चल रहे लकड़ी टालों को हटाना शुरू कर दिया.
आठ जेसीबी के सहारे चार से पांच लकड़ी टालों को ध्वस्त कर दिया गया. यह कार्रवाई आगे भी जारी रहती, लेकिन इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने मामले में हस्तक्षेप कर दिया. इससे कार्रवाई रोक दी गयी है.
इसे भी पढ़ें : कांग्रेस में शामिल हुए प्रदीप और बंधु, आरपीएन ने कहा- जेवीएम के 3 में 2 विधायक कांग्रेस के साथ
एक माह का समय देने की मांग
मौके पर पहुंचे त्रिपाठी ने रेलवे के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे लकड़ी टाल संचालकों कम से कम एक महीने की मोहलत दे. कई लकड़ी टाल संचालकों ने भी रेल अधिकारियों से फरियाद की.
इसके बाद फिलहाल रेलवे अधिकारियों ने यह अभियान अस्थायी तौर पर रोक दिया है.
रेलवे के वरीय अधिकारियों के निर्देश पर चल रहा अभियान: अभियंता
अतिक्रमण विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे रेलवे सहायक मंडल अभियंता कुमार शानू राज ने बताया कि उन्हें लकड़ी टालों को हटाने का निर्देश उच्च अधिकारियों से प्राप्त हुआ है.
उन्होंने बताया कि लकड़ी टाल के लिए रेलवे ने यह जमीन इसलिए दी थी कि इन्हें केवल रेलवे को स्लीपर बनाकर बेचना था, लेकिन अब इन्होंने अपना खुला व्यवसाय शुरू कर दिया है.
इसे भी पढ़ें : साल 2018 में ही जिस स्कूल की मान्यता जैक ने की रद्द, उसी स्कूल से 400 बच्चे दे रहे मैट्रिक परीक्षा
1996 से नहीं भरा किराया
सहायक मंडल अभियंता ने बताया कि 1996 से ही इन्होंने किराया भी नहीं दिया है. यह भी कहा कि वर्ष 2010 से ही रेलवे की जमीन पर लकड़ी टाल संचालित करने वालों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है.
अंतिम बार उन्हें 29.1.2020 को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने जमीन खाली नहीं किया. यही वजह है कि सोमवार को बल प्रयोग कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल की गयी.
गौरतलब है कि रेलवे की भूमि पर यहां कुल 13 टाल संचालित हैं. यहां तीसरी लाइन भी बिछ रही है. इसे देखते हुए रेलवे को 147 क्वार्टर का निर्माण कराना है.
इसके लिए रेलवे को जमीन की आवश्यकता है. बताया जाता है कि करीब 700 एकड़ रेलवे की भूमि पर अवैध कब्जा है.
इसे भी पढ़ें : दो वर्षों में भी नहीं मिले सौ दावेदार, इंतजार में बैठा रहा खेल विभाग




