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पलामू और धनबाद में सरना धर्म कोड लागू करने के लिए बनायी मानव श्रृंखला

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Palamu/Dhanbad: जिले के सतबरवा में एनएच 39 किनारे रविवार को अद्धि कुड़ूख समाज द्वारा सरना धर्म कोड लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया. समाज की सतबरवा प्रखंड ईकाई के बैनर तले मानव श्रृंखला बनाकर धर्म कोड लागू करने की मांग की गयी. सांकेतिक रूप से सड़क किनारे करीब एक किमी के दायरे में लोग दो घंटे तक खड़े रहे. लोग हाथों में सरना धर्म कोड लागू करो का पर्चा और झंडा लिए हुए थे.

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महिला और पुरूष दोनों ने दिया धरना

मानव श्रृंखला बनाकर सांकेतिक प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरूषों ने भाग लिया और सरकार से सरना धर्म कोड लागू करने का आग्रह किया. कार्यक्रम का नेतृत्व अद्धि कुड़ूख सरना समाज के सतबरवा प्रखंड ईकाई के अध्यक्ष बिष्णुदेव उरांव, पर्यवेक्षक सह समिति सदस्य अजय उरांव,शिवशंकर उरांव, संतोष उरांव,प्रेमचंद उरांव कर रहे थे.

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झारखंड राज्य चेरो जनजाति विकास परिषद के गणेश्वर सिंह,सुनीता उरांव, अनीता देवी,प्रमिला देवी, रजनी देवी सहित अन्य सांकेतिक मानव श्रृंखला में शामिल थे.

मानव श्रृंखला बनाकर विरोध कर वक्ताओं ने कहा कि जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड लागू करना होगा. प्रकृति पूजकों को जबतक सरना धर्म कोड के कॉलम में शामिल नहीं किया जायेगा, तब तक अद्धि कुड़ूख सरना समाज का विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. सरना धर्म कोड सरना समाज के लोगों के अस्तित्व से जुड़ा है.

मानव श्रृंखला सतबरवा में उमेश प्रजापति के घर से ब्लॉक होते हुए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय तक बनाया गया. इस दौरान उरांव समाज की महिलाएं पारंपरिक लाल उजले रंग की साड़ी पहन रखी थीं. साथ ही मुंह पर मास्क लगाकर विरोध करते हुए सड़क किनारे दो घंटे तक खड़ी रहीं.

धनबाद में भी सरना धर्म कोड को लेकर बनायी गयी मानव श्रृंखला

वहीं रविवार को धनबाद के पुटकी में भी हेमंत सरकार से सरना धर्म कोड को जल्द से जल्द पारित करने की मांग की गयी. कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के पुरुष, महिला और बच्चों ने हाथों में तख्ती लेकर सड़क पर मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की.

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पलामू: सरना धर्म कोड लागू करने के लिए बनायी मानव श्रृंखला, महिलाओं ने निभायी भागीदारी
सरना धर्म कोड को लागू करने की मांग को लेकर धनबाद में भी बनायी गया मानव श्रृंखला

वहीं मीडिया से बात करते हुए आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि आजतक आदिवासी समाज को अलग-अलग धर्मो से ही जाना जाता रहा है. आदिवासी समाज को अब तक धार्मिक पहचान नहीं मिल सकी है.

इसलिए सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन से आग्रह है कि इस बार की मानसून सत्र में आदिवासियों की मांगों पर विचार करते हुए सरना धर्म कोड को विधानसभा से पास कर केंद्र सरकार को भेजें, ताकि आदिवासी समाज को भी अपनी धार्मिक पहचान मिल सके.

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