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करतारपुर गलियारा में देर करने पर पाक ने कहा- बातचीत के आयोजन पर इच्छुक नहीं भारत

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Islamabad : पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारा शुरू करने के समझौते को अंतिम रूप देने के लिये भारत पर प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता में देर करने का आरोप लगाया. गौरतलब है कि प्रस्तावित करतारपुर गलियारा पाकिस्तान के नरोवाल में गुरुद्वारा दरबार साहिब को पंजाब में गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से जोड़ता है.

बातचीत के आयोजन पर इच्छुक नहीं है भारत

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (एफओ) के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि तयशुदा समय में करतारपुर गलियारा शुरू हो जाए. हालांकि, बैठकों में देरी हो रही है क्योंकि भारत सरकार ऐसे हालात में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बातचीत के आयोजन की इच्छुक नहीं है.

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16 अप्रैल को भारत और पाकिस्तान ने प्रस्तावित गलियारे के तकनीकी पहलुओं पर बैठक का आयोजन किया था. करीब चार घंटे चली बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञों और तकनीशियनों ने पुल के पूरा होने के समय, सड़कों की रूपरेखा एवं प्रस्तावित चौराहों के इंजीनियरिंग पहलुओं पर चर्चा की थी.

प्रस्तावित गलियारे पर बैठक ‘‘जीरो प्वाइंट’’ पर बने अस्थायी तंबू में हुई थी. बैठक के बाद फैसल ने कहा था कि करतारपुर गलियारे पर पाकिस्तान की ओर से तेजी से काम किया जा रहा है.

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क्या है करतारपुर गलियारा

करतारपुर गलियारा सिखों का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है. जहां गुरु नानन देव जी की याद में एक गुरुद्वारा बनाया गयी है. लेकिन यह स्थान पाकिस्तान के नारोंवाल जिले में पड़ता है. जो कि भारत की सीमा से तीन से चार किलोमीटर दूर है. भारत पाकिस्तान का जब बंटवारा किया गया था तो यह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था. जिसकी वजह से श्रद्धालुओं को इसके दर्शन के लिए आज वीजा लेना पड़ता है.

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माना जाता है कि 1522 में गुरु नानक देव जी करतारपुर गए थे. वहां उन्होंने अपने जीवन का आखिरि वत्क गुजारा था. वहीं जिस जगह पर गुरुद्वारा बनाया गया है वहां पर 1539 में गुरु नानक जी ने अपना चोला त्यागा था. साथ ही यह वो गुरुद्वारा है जिसकी नींव गुरु नानक जी ने खुद रखी थी.

बताया जाता है कि एक बार रावी नदी में जोर का बाढ़ आया था जिसके बाद यह गुरुद्वारा उस बाढ़ में बह गया था. लेकिन फिर महाराजा रणजीत सिंह ने इसे फिर से बनवाया. उल्लेखनीय है कि इस गुरुद्वारे में गुरु नानक जी की समाधि और कब्र दोनों ही मौजूद हैं.

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