
- शिक्षकों के वेतमान मामले में सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक उपस्थित हुए
- कोर्ट ने जारी किया था अवमानना नोटिस
Ranchi : माध्यमिक शिक्षा निदेशक को जारी अवमानना नोटिस मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई. हाइकोर्ट जस्टिस सुरजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने मामले में सुनवाई की. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक पर अवमानना नोटिस जारी किया था. साथ ही कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था. गुरुवार की सुनवाई में निदेशक हर्ष मंगला कोर्ट में उपस्थित हुए. इस दौरान कोर्ट ने माध्यमिक निदेशक को कहा कि विभाग से बना नियम गलत है. सचिव और निदेशक कोई भी नियम कानून नहीं बना सकते. इसके लिए कैबिनेट से स्वीकृति जरूरी है.
ऐसे में किस आधार पर शिक्षकों का वेतनमान रोका गया. और क्यों शिक्षकों को लाभ से वंचित रखा गया. इस पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक से अगली सुनवाई तक रिपोर्ट की मांग की गयी है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार पांडेय ने मामले में पक्ष रखा.
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माध्यमिक शिक्षक संघ ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. संघ ने याचिका में बताया है कि राज्य के शिक्षकों को बढ़े हुए वेतनमान का लाभ नहीं मिला है. कई ऐसे शिक्षक हैं जो रिटायर भी हो गये हैं.
शिक्षा विभाग ने साल 1993 से ही शिक्षकों को बढ़े हुए वेतनमान का लाभ नहीं दिया. नियमानुसार 12 साल में प्रवरण वेतनमान और 24 साल की सेवा के बाद वरीय वेतनमान में बढ़ोतरी की जाती है. लेकिन शिक्षकों को अभी तक इसका कोई लाभ नहीं मिला है.
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इस मामले में साल 2015 में ही हाइकोर्ट ने सभी तरह का लाभ देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था. लेकिन सरकार की ओर से कुछ भी नहीं किया गया. इस पर उनकी ओर से अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की गयी.
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