Ranchi

वन अधिकार कानून में प्रस्तावित संशोधन पर हेमंत ने कहा- चुप नहीं बैठेगा JMM

भारतीय वन कानून 1927 के प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ तथा वन अधिकार कानून 2006 के अनुपालन को लेकर जेएमएम का एक दिवसीय धरना प्रदर्शन

रघुवर दास को बताया प्रवासी, कहा- आदिवासी को उनके जमीन से भागना चाहते हैं सीएम

Ranchi: भारतीय वन कानून 1927 के प्रस्तावित संशोधन को जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने 2006 में बने वनाधिकार कानून की मूल भावनाओं के विपरित बताया है.

साथ ही कहा है कि प्रस्तावित संशोधन 2006 के कानून की संवैधानिकता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.

भारतीय वन कानून 1927 के प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ तथा वन अधिकार कानून 2006 के अनुपालन को लेकर सोमवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय विरोध धरना-प्रदर्शन के दौरान हेमंत सोरेन यह बातें कही.

प्रदर्शन के दौरान राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंप, कानून में संशोधन को गलत बताया. वहीं कहा कि प्रस्तावित संशोधन के लागू होने से वनाधिकार कानून 2006 पूरी तरह से अप्रसांगिक हो जाएगा.

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धरना-प्रदर्शन के दौरान कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर हेमंत ने मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भी निशाना साधा. कहा कि वन अधिकार कानून में संशोधन हुआ तो झारखंड मुक्ति मोर्चा चुप नहीं बैठेगा.

झारखंड अंधेरे में डूबा है, पड़ोसी राज्य जगमगा रहा

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के भरपूर प्राकृतिक संसाधनों का रघुवर सरकार दुरुपयोग कर रही है. संसाधन होने के बावजूद झाऱखंड जहां पूरी तरह से अंधेरा से डूबा हुआ है.

वही पड़ोसी राज्य हमारे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर जगमगा रहा है. मुख्यमंत्री रघुवर दास को घेरते हुए हेमंत ने कहा कि दूसरे राज्य के प्रवासी मुख्यमंत्री राज्य के आदिवासियों को अपने जमीन से भगाना चाहते हैं.

लेकिन जेएमएम उनकी इस मंशा को कभी भी पूरा नहीं होने देगा. हेमंत ने कहा कि राज्य के पारा शिक्षकों को वेतन देने के लिए सरकार के पास राशि नहीं है. वहीं अखबार में विज्ञापन देने के लिए सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर रही है.

विकास के नाम पर सरकार झारखंड की जनता को ठगने का काम कर रही है. आंदोलन करने वाले को सरकार जेल में डालने की बात करती है. राज्य पूरी तरह से सूखे के कगार पर है, लेकिन राज्य सरकार के पास किसानों के लिए कोई योजना नहीं हैं.

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सैकड़ों आदिम जनजाति, आदिवासी का अस्तित्व खतरे में 

राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में हेमंत सोरेन ने कहा है कि 2006 के वनाधिकार कानून में 18 दिसंबर 2005 या उसके पूर्व तक वन क्षेत्र में बसने वाले सभी आदिम जनजाति, आदिवासी-मूलवासी को रैयत मान उन्हें भूमि का मालिकाना हक देने की बात की गयी थी.

लेकिन दुर्भाग्यवश सरकार की उदासीनता के कारण सर्वेक्षण का यह काम अभी तक पूरा नहीं हुआ. और रैयतों के दावों को कानूनी रूप नहीं दिया गया है.

इसका परिणाम है कि सैकड़ों वर्षों से वन क्षेत्र में निवास करने वाले आदिम जनजाति, आदिवासी-मूलवासी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.

अब सरकार इस वन कानून में संशोधन करने की तैयारी में है. जिसके विरोध में पार्टी ने पूरे राज्यभर के हर जिले में धरना-प्रदर्शन कर सरकार को सचेत करने का काम किया है.

रघुवर सरकार के खिलाफ गोलबंद होने के जरूरत

उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन को लेकर लड़ाई लंबी चलेगी. न्याय के लिए सभी को रघुवर सरकार के खिलाफ गोलबंद होने की जरूरत है. अगर राज्य के भोले-भाले आदिवासियों को उजाड़ने का काम हुआ तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए हेमंत ने कहा कि वे संकल्प लेकर बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी तत्परता से लग जाये.

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