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न्यूज विंग की खबर पर BJP की प्रेस वार्ता, कहा- आदिवासियों को आगे कर मिशनरी संस्थाएं हड़प रही हैं जमीन

Ranchi: बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने एकबार फिर ईसाई मिशनरी संस्थाओं के द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट का जमकर दुरुपयोग करने की बात कही है.

न्यूज विंग वेब पोर्टल में चली खबर का हवाला देते हुए प्रतुल शाहदेव ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस को संबोधित किया. गौरतलब है कि न्यूज विंग ने 19 जुलाई को ‘सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर ब्रदर ने खरीदी 4.23 एकड़ जमीन, खरीदी 2.6 लाख में, बेची 4.72 करोड़ में’  और 20 जुलाई को ‘CNT उल्लंघन कर जमीन की खरीद-बिक्री में ब्रदर ऑफ संत गेब्रियल एजुकेशन सोसायटी ने 13 साल में कमाये 4.7 करोड़’ शीर्षक से दो खबरें प्रकाशित कर पूरे मामले का खुलासा किया था कि किस तरह जमीन की खरीद-बिक्री में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया गया.  

इन खबरों के प्रकाशित होने के बाद सोमवार को प्रेस वार्ता में बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि नामकुम अंचल के खाता नंबर 3 एवं 142 के प्लॉट नंबर 170, 171, 172, 173,174, 176,177 के कुल 4.23 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री में जमकर गड़बड़ी हुई है.

शैक्षणिक संस्था के रूप में निबंधित ब्रदर्स ऑफ सेंट गेब्रियल सोसाइटी, जिसका मुख्यालय रोम में है, वह इस गड़बड़ी में पूरी तरह से शामिल है.

उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम ब्रदर सिरिल लकड़ा ने वर्ष 2004-2005 में मुंडा खतियान की जमीन को कौड़ियों के मोल खरीदा. रिंग रोड के पास स्थित इस 4.23 एकड़ जमीन की कुल कीमत केवल 2.6 लाख लगायी गयी.

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सीएनटी एक्ट का उल्लंघन

सबसे बड़ी बात ये है कि ब्रदर सिरिल लकड़ा ने तीन अलग-अलग दस्तावेजों में अपने तीन अलग-अलग पते का जिक्र किया हैं.
वही संबंधित अथॉरिटी से परमिशन लेने के लिए भी इन्होंने अपना गलत पता बता कर धोखाधड़ी करने का काम किया है.

प्रतुल ने कहा कि ब्रदर लकड़ा ने किसी दस्तावेज में अपना पता नामकुम बताया है, तो किसी में गुमला और किसी में राजधानी के पुरुलिया रोड का.

पूरी रिपोर्ट यह साफ बताती है कि किस तरह से इन्होंने सीएनटी एक्ट से बचने के लिए थाना की सीमा संबंधी गलत सूचना दी.

जमीन की खरीद-बिक्री में अबतक का सबसे बड़ा प्रॉफिट मार्जिन

प्रतुल ने कहा कि पिछले वर्ष इसी 4.23 एकड़ जमीन को उन्होंने गेल को 4.76 करोड़ में बेच दी. करीब 13 वर्षों में इस जमीन पर उन्होंने 183 गुणा लाभ कमाया, जो की राज्य में किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री में अबतक का संभवतः सबसे बड़ा प्रॉफिट मार्जिन है.

इस जमीन को व्यक्तिगत स्तर पर ब्रदर लकड़ा ने खरीदी, जबकि बेचते समय मिशनरी संस्थाएं सामने आ गयी. मिशनरी संस्थाओं में फादर, ब्रदर और सिस्टर को व्यक्तिगत संपत्ति रखने का कोई हक नहीं. इसके बावजूद यह जमीन ब्रदर सिरील लकड़ा ने अपने नाम पर रजिस्ट्री करायी.

आदिवासियों को आगे करके मिशनरी कर रही जमीन पर कब्जा

उन्होंने लंबे समय से बीजेपी की मांग को याद दिलाते हुए बताया कि मिशनरी संस्थाएं सामाजिक कार्यों को छोड़कर दूसरे अनैतिक कार्यों में भी लगे हैं.

सोसाइटी को जमीन की खरीद और बिक्री में शामिल होने का कोई हक नहीं था. लेकिन जिस तरीके से यह पूरा प्रकरण सामने आया है, उससे साफ है कि संस्थाएं बड़े पैमाने पर ऐसे धंधे में लिप्त है.

जिसमें गरीब आदिवासियों की जमीन को यहां के स्थानीय फादर और ब्रदर्स को आगे करके खरीदी जाती है. फिर बेचते समय मिशनरी संस्थाएं भी उससे जुड़ काफी मुनाफा कमाती हैं.

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य के भोले-भाले आदिवासियों को आगे करके मिशनरी संस्थाओं द्वारा जमीन पर कब्जा कराने के ऐसे दर्जनों उदाहरण है.

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