न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बुढ़ापे में कम वजन खतरनाक, अध्ययन में हुआ खुलासा

बुढ़ापे में वजन कम करने को निम्न कॉर्टिकल घनत्व और मोटाई, अधिक कॉर्टिकल पोरोसिटी और निम्न घनत्व एवं संख्या के साथ जुड़ा पाया गया.

103

Washington : अब जरूरत से ज्यादा मोटा होना अब स्वस्थ माना जा सकता है. शोधकर्ताओं के अनुसार बुढांपे में हड्डियों की सघनता, बनावट और मजबूती में कमी आ सकती है. एक अध्ययन की माने तो बुढ़ापे आने के बाद कंकाल में परिवर्तन के परिणाम नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण थे. 40 वर्षो की उम्र से अधिक लोगों ने पांच प्रतिशत या उससे अधिक वजन कम किया है. उन लोगों में फ्रैक्चर के जोखिम में लगभग तीन गुना बढ़ जाती है. बुढ़ापे में वजन कम करने को निम्न कॉर्टिकल घनत्व और मोटाई, अधिक कॉर्टिकल पोरोसिटी और निम्न घनत्व एवं संख्या के साथ जुड़ा पाया गया.

इसे भी पढ़ें : जाने क्यों आता है भारतीय महिलाओं को Heart Attack !

पुरुषों व महिलाओं की हड्डियों की सूक्ष्म-बनावट में कमी

अमेरिकी की एजिंग रिसर्च के लिए हिब्रू सीनियरलाइफ इंस्टीट्यूट के मुख्य शोधकर्ता डगलस पी. कील ने कहा कि हमने अपने शोध में पाया कि चार से छह साल की कम अवधि के दौरान वजन घटाने वाले पुरुषों व महिलाओं और 40 साल से अधिक उम्र के बाद वजन घटाने वाले पुरुषों व महिलाओं की हड्डियों की सूक्ष्म-बनावट में कमी देखी गई. जबकि वजन नहीं घटाने वाले व्यक्तियों में इस प्रकार की कमी नहीं देखी जा रही है.

इसे भी पढ़ें : WHO की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में शराब पीने से लाखों लोगों की हो चुकी है मौत

595 पुरुष और 796 महिलाएं शोध में शामिल

यह अध्ययन जर्नल ऑफ बोन एंड मिनरल रिसर्च में प्रकाशित हुई थी, इसमें 70 साल की उम्र के औसत वाले 595 पुरुष और 796 महिलाएं शामिल थीं. छह सालों में आए बदलाव को जानने के लिए प्रत्येक चार से छह साल का वजन माप लेने के बाद लंबी अवधि के लिए 40 साल से ज्यादा की उम्र के बाद का माप लिया गया.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

%d bloggers like this: