
Ranchi : जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी है. इसे लगाने बाध्यता भी है लेकिन राजधानी के ऐसे कई सरकारी व निजी प्रतिष्ठान, आवास और मेडिकल कालेज, जैसे बड़े भवन है, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाये गये हैं. निगम की जल बोर्ड शाखा की मानें, तो शहर के कुल 208 भवनों को नोटिस भेजकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने के बारे में जानकारी मांगी गयी है.
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स्पेरो सॉफ्टेक द्वारा नोटिस भेजा जा रहा है
जल बोर्ड शाखा के सिटी मैनेजर मृत्युंजय पांडेय ने बताया कि शहर के किन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है, उसके लिए कुल 308 भवनों को चयनित कर उनसे हार्वेस्टिंग सिस्टम होने के संबंध में पूछा गया था. जिसके जवाब में करीब 100 प्रतिष्ठानों ने अभी तक ऐसा करने की पुष्टि की है. वहीं अभी भी 208 भवन ऐसे है, जिसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है. ऐसे भवनों को ऑउटसोर्सिंग कर रही कंपनी स्पेरो सॉफ्टेक द्वारा नोटिस भेजा जा रहा है.
मात्र 32,000 निजी घरों में ही है सिस्टम
निगम की राजस्व शाखा द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2018-19 के आंकड़ों को देखें तो वर्तमान में 1.80 लाख मकानों में से केवल 32 हजार मकान ही ऐसे हैं, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण हुआ है. करीब 1.48 लाख ऐसे मकान हैं, जिनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा नहीं है. इतने अधिक घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने से शहर के भूगर्भ जल का स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. हालांकि ऐसा नहीं होने पर 2016 में बनायी होल्डिंग टैक्स नियमावली के तहत निगम होल्डिंग टैक्स के रूप में करोड़ रूपये टैक्स वसूली कर चुका है. लेकिन फिर भी आम लोग इसके लिए जागरूक नहीं है.
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इन प्रमुख भवनों में नहीं है सिस्टम
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च सेंटर, नामकुम
झारखंड ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नामकुम
कर्मचारी राज्य बीमा निगम, नामकुम
राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स)
रांची कॉलेज,
डोरंडा कॉलेज,
मारवाड़ी महिला वूमेन कॉलेज,
रांची विश्वविद्यालय,
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कचहरी रोड
दूरदर्शन कॉलोनी,
आकाशवाणी कॉलोनी,
झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन
गांधी नगर कॉलोनी,
रांची रिजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरआरडीए),
वीमेन गवर्नमेंट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, बरियातू
सेक्रेटरी को ऑपरेटिव सोसायटी, अशोक नगर
स्टेट इलेक्शन कमीशन, रातू रोड
पोस्ट ऑफिस, डोरंडा
धुर्वा थाना,
हिंदपीड़ी थाना,
हरमू हाउसिंग कॉलोनी
इसलिए जरूरी है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
इस सिस्टम में मकान के आसपास एक सोख्ता गड्ढा बनाकर इसे मकान की छत से पाइप के सहारे जोड़ा जाता है. इस पर अधिक से अधिक 15 से 20 हजार रुपए खर्च होते हैं. इस सिस्टम से बारिश के दौरान मकान की छत का पानी गड्ढे में चला जाता है. इससे आसपास के जल स्रोतों हैंडपंप और ट्यूबवेल के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है. पानी की समस्या से छुटकारा मिलता है. केन्द्रीय भूजल सर्वेक्षण के रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में वर्ष 2010 में भूजल के 150 फीट नीचे आसानी से मिलता था, लेकिन 2017 में यही 400 फीट तक नीचे चला गया है.
रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं होने का असर इससे भी पता चलता है कि वार्ड 26 स्थित विद्यानगर इलाकों में रेन वाटर हार्वेंस्टिंग नहीं होने के कारण करीब 1000 घऱों को बोरिंग पूरी तरह से सूख गया. वहीं हरमू हाईकोर्ट कॉलोनी में दो बार किये गये करीब 900 फीट बोरिंग पूरी तरह से फेल हो गये हैं.




