न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

14वें वित्त आयोग से मिले 4214.33 करोड़ का ऑडिट टेंडर होगा रद्द

862

Ranchi : केंद्र से 14वें वित्त आयोग से मिल रहे अनुदान की ऑडिट नहीं करा पा रही राज्य सरकार अब निकाला गया टेंडर रद्द करने पर विचार कर रही है. आठ माह पहले निविदा आमंत्रित की गयी थी. बार-बार विभाग द्वारा कहा जा रहा है कि निविदा समिति के सभी सदस्यों के नहीं रहने से दिक्कतें आ रही हैं.

पंचायती राज सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा कि अब तक ऑडिट को लेकर कई तिथियां बदल गयी हैं. ऐसे में ऑडिट कंपनियों का चयन नहीं हो पाना परेशानी का शबब बन गया है. विभाग की तरफ से ऑडिट संबंधी निविदा को अंतिम रूप नहीं दिये जाने के बाद भी कुछ कंपनियां अपना नाम चयन होने का दावा करने लगी हैं.

इसे भी पढ़ेंःऑर्किड अस्पताल को बचाने में अड़े सिविल सर्जन, दो जांच के बाद भी कह रहे तीसरी जांच हो

इसमें अंजलि जैन एंड कंपनी, आरके सिन्हा, एस जयकिशन और अरुण गोयल फर्म शामिल हैं. इन फर्मों का दावा है कि इनका चयन चाईबासा, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला जिले के लिए किया गया है. इन बातों को विभागीय सचिव काफी नाराज भी हैं.

केंद्र से मिलनेवाले कुल अनुदान और खर्च के आधार पर झारखंड को 3.139 प्रतिशत राशि आयोग से मिल रही है. इस राशि से सर्व शिक्षा अभियान, मनरेगा, सांसद कोष, स्वच्छता अभियान जैसी आधारभूत संरचना को और मजबूत किया जायेगा. 14वें वित्त आयोग से झारखंड को 2019-20 तक कुल 6046.73 करोड़ रुपये मिलने हैं. अब तक 4214.33 करोड़ रुपये राज्य को मिल चुके हैं. 14वें वित्त आयोग का कार्यकाल डेढ़ साल में समाप्त हो जायेगा.

इसे भी पढ़ेंःझारखंडः तो क्या तमाम व्यवस्था डिरेल हो गयी है मुख्यमंत्री जी

14वें वित्त आयोग के अलावा 6196 करोड़ का मिला अतिरिक्त ग्रांट 

SMILE

राज्य को 13वें और 14वें वित्त आयोग के अलावा 6196 करोड़ का अतिरिक्त ग्रांट भी मिला है. जानकारी के अनुसार 14वें वित्त आयोग से झारखंड को 2014-15 में 652.83 करोड़, 2016-17 में 1022.53 करोड़, 2017-18 में 1178.63 करोड़, 2018-19 में 1360.62 करोड़ रुपये मिले हैं.

2019-20 में 1832.12 करोड़ और मिलेंगे. वित्त आयोग के अनुदान में 90 प्रतिशत सहायता मूल अनुदान के रूप में दी जाती है, जबकि 10 फीसदी राशि परफॉर्मेंस के आधार पर राज्यों को दी जाती है.

इसे भी पढ़ेंःIFS संजय कुमार और राजीव लोचन बख्शी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप की जांच हो या न हो मंतव्य नहीं दे रहा वन विभाग

78 कंपनियों ने दिया था आवेदन

पंचायतों के ऑडिट करने के लिए 78 कंपनियों ने आवेदन दिया था. इसमें से पांच को तय क्वालिफिकेशन का पालन नहीं करने की वजह से रद्द कर दिया गया. 73 कंपनियों में से कौन सी कंपनी पंचायतों का ऑडिट करेगी यह प्रस्ताव फाइलों में ही बंद है. जानकारी के अनुसार 2015-16 से लगातार ऑडिट होना है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: