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आइआइएम रांची के नये कैंपस निर्माण में नहीं आयेगी दिक्कत : प्रो शैलेंद्र सिंह

केंद्र सरकार का बजट रांची के लिए पूर्व से है आवंटित, कैंपस निर्माण में देर की वजह स्थायी निदेशक का नहीं होना

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Deepak

Ranchi: भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) रांची के नये कैंपस का निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा. कोर कैपिटल एरिया में 65 हजार वर्ग मीटर में नया कैंपस तीन वर्ष में बनकर तैयार होगा. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के इस फैसले से कि नये आइआइएम सेल्फ सफीशियेंट बनें, इसको लेकर कई बातें सामने आ रही थीं. केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब नये आइआइएम को केंद्रीय सहायता नहीं मिलेगी, वे अपनी खुद करें और संभालें. केंद्र सरकार का मानना है कि नये आइआइएम में से कई का कैंपस अब तक नहीं बना है और कुछ जगहों पर 2014-15 में निर्माणकार्य शुरू हुआ.

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इन तमाम बातों पर आइआइएम रांची के निदेशक प्रो शैलेंद्र सिंह ने विस्तार से न्यूजविंग से बातचीत की. उन्होंने कहा कि नये कैंपस का समय पर निर्माण नहीं होने के कई कारण हैं. लेकिन इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं आयेगी. केंद्र सरकार ने 2009-10 में खोले गये आधा दर्जन से अधिक नये आइआइएम के कैंपस निर्माण का अलग से बजटीय प्रावधान कर रखा है. रांची को इसमें से 333 करोड़ रुपये मिलने हैं. पहली किस्त के 70 करोड़ रुपये की राशि मिल चुकी है.

उन्होंने कहा कि कोर कैपिटल एरिया के 25 एकड़ जमीन में अब निर्माण कार्य में तेजी से काम आगे बढ़ेगा. नये चेयरमैन प्रवीण शंकर पांड्या और निदेशक मंडल के अन्य निदेशकों की तरफ से कैंपस निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है. 2019 के अंत से कक्षाएं भी शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल कैंपस निर्माण को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से मदद लेने का प्रस्ताव भेजा जायेगा.

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पूर्व में स्थायी निदेशक नहीं रहने से कैंपस निर्माण को लेकर परेशानी हुई

आइआइएम रांची का स्थायी निदेशक नहीं रहने से भी नये कैंपस निर्माण का काम बाधित रहा. पहले निदेशक एमजे जेवियर थे. जो तीन वर्षों बाद यानी 2013-14 में यहां से वीआइटी वेल्लोर यूनिवर्सिटी चले गये. इसके बाद प्रभारी निदेशक के रूप में कोलकाता आइआइएम के निदेशक प्रो अनिंदय सेन को रांची का काम सौंपा गया. वो 7.11.2014 से लेकर 8.3.2017 तक रांची के निदेशक रहे. इनके कार्यकाल में स्थायी कैंपस के निर्माण कार्य में कोई खास निर्णय नहीं लिया गया. राज्य सरकार की तरफ से पहले नगड़ी में और फिर कोर कैपिटल एरिया पुंदाग में आइआइएम रांची को जमीन आवंटित की गयी. नगड़ी में दी गयी जमीन में विवाद होने से मामला गड़बड़ा गया था. कोर कैपिटल एरिया में भी बाउंड्रीवाल निर्माण में स्थानीय विरोध भी हुआ था.

2015 से दो साल लगा दिये केंद्र ने स्थायी निदेशक बनाने में

केंद्रीय मानव संसाधन विभाग की तरफ से रांची आइआइएम समेत अन्य आइआइएम के स्थायी निदेशक के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया 2015 में शुरू की गयी थी. इस पर निर्णय लेने में दो वर्ष और लग गये. प्रो शैलेंद्र सिंह ने 7.3.2017 में रांची आइआइएम का निदेशक का पदभार ग्रहण किया. इसके बाद आइआइएम रांची के नये चेयरमैन प्रवीण शंकर पांड्या बने. 2017-18 के अंत में नये कैंपस निर्माण की प्रक्रिया काफी तेज हुई.

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सूचना भवन में चल रहा है अस्थायी कैंपस

रांची आइआइएम का शैक्षणिक कैंपस 2010 से ही सूचना भवन के दो फ्लोर पर चल रहा है. यहां पर मुख्य कैंपस है. 3.7.2017 से चौहान बिल्डिंग में सैटेलाइट कैंपस चलाया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष होनेवाले 200 से अधिक छात्रों के नामांकन के बाद अस्थायी छात्रावास रांची के होटवार स्थित खेलगांव परिसर में चल रहा है. रांची में मैनेजमेंट के पीजीडीएम कोर्स, पीजीडीएम इन एचआरडी और एग्जिक्युटिव कोर्स संचालित किये जाते हैं.

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