
कोरोना से हुई मौतों में जैसे ही दिल्ली के निजामुद्दीन मर्कज का नाम आया, यहां की तब्लीगी जमात और मर्कज, दोनों चर्चे में आ गये हैं. मर्कज पर आरोप है कि लॉकडाउन के बावजूद यहां हजारों लोगों का एक बड़ा समूह रुका हुआ था. इसमें कई विदेशी भी थे. और संक्रमण यहीं से फैला. जिससे अब तक छह मौतें हो चुकी हैं. यहां रह चुके या यहां रहे चुके लोगों के संपर्क में आये दर्जनों लोगों को क्वारेंटाइन में ऱखा गया है. इस बीच निजामुद्दीन मर्कज ने अपनी सफाई में एक प्रेस रीलिज किया है. इसमें उसने बताया है कि लोगों को भेजने के लिए कम से कम दो बार प्रशासन व पुलिस से अनुमति मांगी गयी. वाहनों के पास मांगे गये, जो आज तक नहीं दी गयी. मर्कज की ओर से अंग्रेजी में जारी इस रीलिज का अनुवाद हम यहां पोस्ट कर रहे हैं :
तबलीगी जमात का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है मर्कज
मर्कज निज़ामुद्दीन करीब लगभग 100 से तबलीगी जमात का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है. दुनिया भर से मुस्लिम अतिथि और मजहबी लोग यहां 3-5 दिनों तक चलने वाले पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने आते हैं. दूर-दराज के स्थानों से आगंतुकों के आने के कारण कार्यक्रमों की रूपरेखा एक साल पहले ही तय कर दी जाती है.
जब माननीय प्रधानमंत्री ने 22 मार्च 2020 को “जनता कर्फ्यू” की घोषणा की, तो 21 मार्च 2020 से जारी कार्यक्रम को रोक दिया गया. देश भर में रेल सेवाओं के अचानक रद्द हो जाने के कारण बाहर से आये लोगों को मर्कज में ही रुक जाना पड़ा.
22 मार्च 2020 को, “जनता कर्फ्यू” लागू हुआ. इस आलोक में यहां रुके लोगों को को सलाह दी गयी कि माननीय प्रधानमंत्री के कहे अनुसार 9 बजे तक बाहर न निकलें. इस वजह से रेलवे के अलावा अन्य माध्यमों से लोगों की वापस जाने की योजना भी कामयाब नहीं हुई.
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जनता कर्फ्यू के रात 9 बजे तक समाप्त होने की घोषणा के पहले ही दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री ने 23 मार्च 2020 को सुबह 6 बजे से 31 मार्च 2020 तक के लिए दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की. इस कारण लोग उस दिन भी यहां से नहीं निकल पाये.
इस बीच लगभग पंद्रह सौ अतिथि किसी तरह वाहन का इंतेजाम कर मर्कज से चले गये.
23 मार्च की शाम को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा स्पष्ट संदेश के साथ एक और देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गयी. जो जहां हैं, उन्हें वहीं रहने के लिए कहा गया. ऐसे में बचे हुए अतिथियों को निर्धारित चिकित्सकीय सावधानी के साथ मर्कज में रखा गया.
24 मार्च 2020 को अचानक SHO, हजरत निजामुद्दी की ओर से नोटिस जारी किया गया. इसमें मर्कज को बंद करने के लिए कहा गया. हमने उसी दिन इस नोटिस का जवाब दिया कि मर्कज पहले से बंद है. पंद्रह सौ लोग यहां से जा चुके हैं.
विभिन्न स्थानों से आये लगभग एक हजार लोग यहां फंसे हुए हैं. इसी के साथ प्रशासन से वाहनों के पास निर्गत करने का भी निवेदन किया गया. ताकि दिल्ली से बाहर के लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया जा सके.
इस आवेदन के साथ 17 वाहनों की लिस्ट और उनके चालकों के नाम, वैलिड लाइसेंस के साथ संलग्न किया गया. जिसकी अनुमति अभी तक नहीं मिली है.
25 मार्च 2020 को, तहसीलदार ने मेडिकल टीम के साथ मर्कज का दौरा किया. इस टीम ने कई लोगों की जांच की. और हमारी ओर से टीम को पूरा सहयोग किया गया.
26 मार्च 2020 को प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने मर्कज का दौरा किया और हमें मीटिंग करने के लिए बुलाया गया. हमने अधिकारियों के साथ मीटिंग की. हमने उन्हें फंसे हुए लोगों की जानकारी दी. और इन्हें वापस भेजने और वाहनों की अनुमति की मांग की. इन वाहनों की व्यवस्था भी हमने खुद की थी.
अगले दिन 27 मार्च को, छह लोगों को चेकअप के लिए ले जाया गया.
28 मार्च को डब्ल्यूएचओ की टीम ने दौरा किया
28 मार्च 2020 को प्रशासन और डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की टीम ने मर्कज का दौरा किया. और 33 लोगों को राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया.
आश्चर्यजनक रूप से उसी दिन एक और नोटिस जारी किया गया. इस बार एसीपी लाजपत नगर के कार्यालय द्वारा, निषेधात्मक आदेशों और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी को दोहराते हुए नोटिस भेजा गया था.
हालांकि जो भी आदेश थे, मर्कज उनका पालन पहले से कर रहा था. फिर भी 29 मार्च को इस नोटिस का जवाब दिया गया.
कल, 30 मार्च 2020 को, सोशल मीडिया पर एक अफवाह फैलने लगी कि COVID-19 से प्रभावित लोग मर्कज में मौजूद हैं. यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि कुछ मौतें उसी के कारण हुई हैं.
अप्रत्याशित रूप से, जैसा कि एएनआई द्वारा रिपोर्ट जारी किया गया है, दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को मर्कज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
यहां विनम्रतापूर्वक कहना है कि यदि उपरोक्त तथ्य-जांच माननीय मुख्यमंत्री के कार्यालय द्वारा संभव हो तो अधिकारियों को हमारे अब तक के सहयोग से अवगत कराया जा सकेगा.
इस पूरे प्रकरण के दौरान, मर्कज निजामुद्दीन ने कभी भी कानून के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया. और विभिन्न राज्यों से दिल्ली आने वाले अतिथियों के प्रति सहानुभूति की कोशिश की.
हमने उन्हें न चिकित्सा दिशा-निर्देशों से इतर कुछ करने दिया न कहीं बाहर निकलने दिया. जो कि गैरकानूनी होता.
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