
Ranchi : गांजा तस्करी के फर्जी मामले में निर्दोष ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष को धनबाद पुलिस ने जेल भेज दिया था. इस कांड के अनुसंधान का प्रभार तत्काल प्रभाव से सीआइडी ने अपने जिम्मे ले लिया है. इस मामले में धनबाद के पुलिस अफसरों पर आरोप है कि किसी के कहने पर इसीएलकर्मी को फर्जी मामले में फंसाया गया था. सवाल उठ रहा है कि किसके कहने पर ? एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर गांजा कहां से लाया गया ? पुलिस ने खुद रखा या किसी दूसरे तस्कर से मंगाया ?
इस कांड के अनुसंधान के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है. जिसका नेतृत्व डीएसपी रैंक के पदाधिकारी द्वारा किया जाएगा. इंस्पेक्टर, दरोगा और एएसआई रैंक के पदाधिकारी इस कांड के अनुसंधान में सहयोग करेंगे.
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निरसा थाना प्रभारी किए गए थे निलंबित
ईसीएल कर्मी चिरंजीत घोष को गांजा कारोबारी बताकर जेल भेजने के मामले में निरसा थाना प्रभारी सस्पेंड कर दिये गये हैं. मामले की जांच के बाद बोकारो डीआइजी प्रभात कुमार के आदेश पर निरसा थाना प्रभारी उमेश कुमार सिंह को एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया गया है.
डीआईजी प्रभात कुमार के द्वारा निरसा डीएसपी से कुछ सवालों का जवाब मांगा गया है. इन सभी सवालों का जवाब एसएसपी के माध्यम से देने को कहा गया है.
गौरतलब है कि ईसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट में कार्यरत कोलकर्मी चिरंजीत घोष को गांजा तस्करी के एक मामले में निरसा थाना प्रभारी उमेश सिंह ने जेल भेज दिया था.
कोलकर्मी की पत्नी ने सीएम से की थी शिकायत
ईसीएल के झांझरा प्रोजेक्ट में कार्यरत कोलकर्मी चिरंजीत घोष की पत्नी श्रावणी शेवाती ने मामले की शिकायत सीएम से की थी. श्रावणी ने अपनी शिकायत में कहा था कि बंगाल के एक एसडीपीओ उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं.
उसने फोन पर अनचाहा दबाव बनाने की कोशिश की थी. एसडीपीओ की बात न मानने पर धनबाद पुलिस से सांठगांठ कर उसके पति को झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया.
8 मई को सीआइडी के एडीजी अनिल पाल्टा ने मामले की जांच की जिम्मेदारी बोकारो डीआइजी प्रभात कुमार को सौंपी थी. जांच के बाद डीआइजी ने निरसा थाना प्रभारी को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया था.
क्या है मामला
25 अगस्त, 2019 को धनबाद के निरसा में पुलिस ने एक सेवरले गाड़ी से 39 किलो गांजा बरामद किया था. इस मामले में धनबाद पुलिस ने ईसीएल कर्मी चिरंजित घोष को गांजा तस्करी का किंगपिन बताते हुए आरोपी बनाया था. धनबाद पुलिस ने इस मामले में चिरंजीत को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था.
चिरंजीत के जेल भेजे जाने के बाद उसकी पत्नी ने तत्कालीन डीजीपी केएन चौबे समेत राज्य पुलिस के अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर इंसाफ की गुहार लगायी थी. चिरंजीत की पत्नी के मुताबिक उसके पति को बंगाल पुलिस के एक अधिकारी ने साजिश कर फंसाया था.
जिसके बाद मुख्यालय स्तर से मामले की जांच करायी गयी. जांच में यह साबित हुआ था की चिरंजीत को गलत तरीके से फंसा कर जेल भेजा गया था. पुलिस ने पोल खुलने के बाद कोर्ट में तथ्यों की भूल बताते हुए चिरंजीत को रिहा कराया था.
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