NEWS

दुमका प्रशासन से NCPCR नाराज, कहा- आदिवासी बच्ची हत्याकांड में जांच में नहीं मिल रहा सहयोग

Ranchi/Dumka: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की टीम आज दुमका में है. आयोग के प्रमुख प्रियंक कानूनगो दो मामलों की पड़ताल पर हैं. एक मामला शाहरुख और उसके साथियों के द्वारा 12वीं की एक स्टूडेंट को जला कर मारने का है. दूसरा एक नाबालिग आदिवासी लड़की को दुष्कर्म के बाद मारे जाने का है. प्रियंक ने आदिवासी लड़की के मामले में दुमका जिला प्रशासन से सहयोग नहीं मिलने की बात कही है. ट्विटर पर भी उन्होंने लिखा है कि झारखंड सरकार को पूर्व में सूचित किया था कि एसटी वर्ग की जिस बच्ची की बलात्कार के बाद हत्या की गई, उसके परिवार से NCPCR की टीम मिलेगी. स्थानीय कलेक्टर ने भी सहमति इसके लिए दी थी. पर बच्ची के गाँव जाने पर पता लगा कि उसके मां-पिता को जीप में बैठाकर कोई ले गया है. सरकार का यह रवैया बेहद असहयोगात्मक और जांच में रुकावट डालने वाला है.

दुमका बंदी में गये हैं मां- पिता

जानकारी के अनुसार आज आदिवासी संगठनों के संयुक्त आह्वान पर समूचे संताल में बंद का आयोजन किया गया है. खासकर दुमका में इसका असर ज्यादा है. सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति बेहद कम है. दुकानें बंद हैं. सडकों पर बड़ी गाडियों के अलावा दोपहिया वाहन भी गिने चुने नजर आ रहे हैं. जिस आदिवासी बच्ची का दुष्कर्म के बाद मर्डर हुआ है, उसके घर पर रानीश्वर में आज NCPCR और सीडब्ल्यूसी की टीम गयी थी. इस दौरान उसकी मौसी और उसकी बहन से जानकारी ली गई. वहीं

पता लगा कि मां- पिता दुमका बंद कार्यक्रम में शामिल होने स्थानीय ग्राम प्रधान के साथ गये हैं. इस पर रानीश्वर बीडीओ से कहा गया कि बच्ची के मां-पिता को भी NCPCR की टीम से भेंट सुनिश्चित करायी जाए.

इसके अलावा जलाकर मारी गई नाबालिग लड़की के घर पर भी उसके पिता, दादा-दादी और अन्य से NCPCR और सीडब्ल्यूसी की टीम मिली. दोनों कार्यक्रम के दौरान NCPCR ने मीडिया कर्मियों को फोटो लेने और अन्य हस्तक्षेप से दूर रखा था.

दुमका एसडीपीओ के बर्खास्तगी की मांग

आदिवासी युवा मंच, आदिवासी क्रांति सेना, मरांग बुरू अखड़ा, छात्र समन्वय समिति, सिदो कान्हू युवा संगठन, बजरंग दल, समेत तमाम संगठन दुमका में नाबालिग बच्ची की हत्या को लेकर विरोध में सड़कों पर हैं. दुमका बंद में जनसमर्थन भी उन्हें मिला है. संगठनों ने मांग की है कि सभी दोषियों की गिरफ्तारी और फांसी हो. सीबीआई सुनवाई हो. मृतका के परिजन को एक करोड़ मुआवजा राशि और सरकारी नौकरी मिले. दुमका एसडीपीओ नूर मुस्तफा को बर्खास्त किया जाये.

 

सरकार की कोशिश सच्चाई बाहर नहीं आए: बाबूलाल

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है कि दुमका की दो बच्चियों की निर्ममतापूर्वक हत्या पर गंभीर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग National Commission for Protection of Child Rights के अध्यक्ष Priyank Kanoongo को दुमका प्रशासन ने षड्यंत्रपूर्वक रानीश्वर के पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया गया. सच्चाई लोगों के सामने न आ सके, इसके लिए अब सरकार छल कपट का सहारा लेने लगी है. इससे पूर्व भी सड़कों पर उतर कर न्याय की मांग कर रही महिलाओं के साथ पुलिस ने अभद्रता की थी और पीड़िता के शव का आनन-फानन में परिजनों की अनुपस्थिति में अंतिम संस्कार कर दिया. “ऐसी घटनाएं घटते रहती है” कहने वाले सीएम साहब क्या आप नहीं चाहते कि राज्य के आदिवासी बच्चियों को न्याय मिले?

Related Articles

Back to top button