
Ranchi: परिवहन और जल संसाधन इंजीनियरिंग में हाल के विकास पर एक राष्ट्रीय सेमिनार बुधवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने भाग लिया. सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित इस सेमिनार का उद्देश्य उभरती चुनौतियों का समाधान करना, नवीनतम तकनीकों को प्रदर्शित करना और इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार पर चर्चा करना था.
इस सेमिनार की मुख्य अतिथि झारखंड की स्वच्छ भारत मिशन (SBM) निदेशक एवं IAS अधिकारी डॉ. नेहा अरोड़ा थी. उद्घाटन सत्र में, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय सिंह ने स्वागत भाषण दिया और सतत एवं कुशल बुनियादी ढांचे के विकास के महत्व पर जोर दिया. इसके बाद, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के अकादमिक डीन, प्रो. मनोज कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए उन्नत परिवहन प्रणाली और आधुनिक जल संसाधन प्रबंधन की भूमिका को राष्ट्रीय विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के के लिए महत्वपूर्ण बताया. सेमिनार के उद्घाटन सत्र के अंत में, आयोजन सचिव और सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रतिभा वर्वड़े ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.
सेमिनार में प्रख्यात वक्ता के तौर पर डॉ. चालुमुरी रविशेखर, मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, टीपीई, सीआरआरआई; डॉ. प्रफुल्ल सिंह, प्रोफेसर और प्रमुख, स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायर्नमेंटल साइंस, सेंट्रल यूनि यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी, गया); डॉ. पल्लबी दास, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीआईएमएफई, धनबाद, डॉ. एस. एस महापात्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी आईएसएम धनबाद; और डॉ. अश्विनी तिवारी, सहायक प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान स्कूल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू-नई दिल्ली) भी शामिल हुए.
प्रमुख संस्थानों के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर शोध निष्कर्ष और केस स्टडी प्रस्तुत की, जिसमें खदान-जल उपचार, मूल्य निर्धारण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन में झिल्ली पृथक्करण का अनुप्रयोग, भूजल प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और यात्रा मांग प्रबंधन के माध्यम से सतत परिवहन योजना शामिल है. सेमिनार में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और रसायन विज्ञान के माध्यम से गतिशीलता को सशक्त बनाने और स्थिरता के लिए खदान-जल का उपयोग करने पर भी चर्चा की गई.
समापन सत्र में, आयोजन सचिव और सहायक प्रोफेसर अमित कुमार यादव ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और भारत में परिवहन एवं जल संसाधन प्रबंधन के भविष्य को आकार देने में अनुसंधान और नवाचार की निरंतरता की आवश्यकता पर बल दिया.
सेमिनार का समापन एक सकारात्मक नोट पर हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने इसे राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की स्थिरता और मजबूती को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में मान्यता दी. इस सेमिनार से प्राप्त निष्कर्षों से भविष्य की नीतियों और व्यावहारिक कार्यान्वयन में योगदान की अपेक्षा की जाती है.
इस कार्यक्रम के दौरान सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सभी संकाय सदस्य प्रो. एच. पी. सिंह, डॉ. पी. के. पारही, डॉ. बीरेन्द्र भारती, डॉ. सुचित कुमार पटेल, डॉ. शिखा चौरसिया और डॉ. रजदीप पॉल उपस्थित थे. इसके अलावा, विभाग के सभी गैर-शिक्षण कर्मचारी, सभी यूजी-पीजी एकीकृत छात्र, एम.टेक छात्र और शोधकर्ता भी उपस्थित रहे.




