
Kolkata: नारदा स्टिंग मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चारें नेताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है. कोलकाता हाईकोर्ट ने चारों नेताओं को हाउस अरेस्ट रहने का आदेश दिया है. कोलकाता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ ने यह फैसला सुनाया है. फैसले पर पीठ के दोनों जजों में मतभिन्नता दिखी. जज अरिजीत बनर्जी चारों को जमानत देने के पक्ष में थे, मगर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश इसके खिलाफ थे.
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मालूम हो कि सीबीआई ने सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, फिरहाद हकीम और पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारी के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तल्ख हैं. अदालत ने नजरबंदी का फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस दौरान वो कार्यालय से संबंधित काम कर सकते हैं.
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जानें, क्या है नारदा स्टिंग
साल 2016 में बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक किए गए थे. ऐसा दावा किया गया था कि ये टेप साल 2014 में रिकॉर्ड किए गए थे. इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले वयक्तियों को कथित रूप से एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से कैश लेते दिखाया गया था.
यह स्टिंग ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था. साल 2017 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन टेप की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था.
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