
New Delhi : उत्तराखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को छह परियोजनाओं का ऑनलाइन लोकार्पण किया. इन परियोजनाओं को नमामि गंगे के तहत तैयार किया गया है. आज जिन परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया उनमें हरिद्वार के जगजीतपुर में 68 एमएलडी एसटीपी, 27 एमएलडी का अपग्रेडेशन एसटीपी और सराय में 18 एमएलडी का एसटीपी शामिल हैं. इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ऑनलाइन शामिल हुए.
मौके पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से यहां देश का पहला चार मंजिला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हो चुका है. इससे उत्तराखंड में सफाई व्यवस्था सुदृढञ होगी, हरिद्वार में भी 20 से अधिक नालों को बंद किया जा चुका है.प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले इन नालों की वजह से गंगा जी के दर्शन के लिए आने वाले और राफ्टिंग करने वाले साथियों को बहुत परेशानी होती थी. उन्होंने कहा कि अब गंगा म्यूजियम के बनने से यहां का आकर्षण और अधिक बढ़ जाएगा. ये म्यूजियम हरिद्वार आने वाले पर्यटकों के लिए, गंगा से जुड़ी विरासत को समझने का एक माध्यम बनने वाला है.
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गंगा में गिरनेवाले नालों को बंद किया गया
प्रधानमंत्री ने पहले की हालत की चर्चा करते हुए कहा कि उत्तराखंड में तो स्थिति ये थी कि गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ से हरिद्वार तक 130 से अधिक नाले गंगा जी मे गिरते थे. आज इन नालों में से अधिकतर को रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि आज नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर या तो काम चल रहा है, या पूरा हो चुका है.प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के किनारे बसे 100 बड़े शहरों और 5,000 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करना है. इसके अलावा गंगा की सहायक नदियों से भी प्रदूषण रोकने के लिए पूरी ताकत लगाना होगा.
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गंगा देश की आधी आबादी को समृद्ध करती है
सरकार की उपलबधियों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चारों दिशाओं में एक साथ काम आगे बढ़ाया है. इसके तहत गंगा नदी में गंदा पानी ना गिरे इसे रोकने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का जाल बिछाना शुरू किया. इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ऐसे बनाए गए हैं जो अगले 10-15 साल की जरूरतें पूरी कर सकेंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि पुराने तौर-तरीके अपनाए जाते, तो आज भी हालत उतनी ही बुरी रहती. लेकिन हम नई सोच, नई अप्रोच के साथ आगे बढ़े. हमने नमामि गंगे मिशन को सिर्फ गंगा जी की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बनाया है. उत्तराखंड में उद्गम से लेकर पश्चिम बंगाल में गंगा सागर तक मां गंगा, देश की करीब-करीब आधी आबादी के जीवन को समृद्ध करती हैं, इसलिए गंगा की निर्मलता आवश्यक है.
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