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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, कॉमन सिविल कोड न्यायसंगत नहीं, आम राय तैयार करेंगे

11 और 13 अक्टूबर को हुई बोर्ड की डिजिटल बैठकों में समान नागरिक संहिता और बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले से जुड़े अहम फैसले लिये गये

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NewDelhi : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि वह समान नागरिक संहिता (कॉमन सिविल कोड) के खिलाफ विभिन्न तबकों के साथ मिलकर आम राय तैयार करेगा. खबर है कि बोर्ड कार्यकारिणी की पिछले दिनों हुई डिजिटल बैठकों में यह फैसला लिया गया.

इस संबंध में बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य जफरयाब जीलानी ने शनिवार को भाषा को जानकारी दी कि 11 और 13 अक्टूबर को हुई बोर्ड की डिजिटल बैठकों में समान नागरिक संहिता और बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले से जुड़े अहम फैसले लिये गये.

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भाजपा के एजेंडे में अब समान नागरिक संहिता का मुद्दा ही बचा है

उन्होंने बताया कि बोर्ड सदस्यों का यह कहना था कि सत्तारूढ़ भाजपा के एजेंडा में अब समान नागरिक संहिता का मुद्दा ही बचा रह गया है. अंदेशा है कि अब भाजपा इस दिशा में आगे बढ़ेगी. बोर्ड के सदस्यों का कहना था कि भारत विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों वाला देश है. यहां ऐसी कोई संहिता लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा.

जीलानी ने बताया कि बैठक में फैसला लिया गया है कि बोर्ड समान नागरिक संहिता लागू किये जाने की स्थिति में प्रभावित होने वाले विभिन्न तबकों से संपर्क कर उनके जनप्रतिनिधियों जैसे सांसदों विधायकों से संपर्क कर एक आम राय तैयार करेगा.

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बाबरी मस्जिद मामले में उच्च न्यायालय में अपील करेगा बोर्ड

उन्होंने बताया कि बोर्ड ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद मामले में पिछले 30 सितंबर को सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है. जीलानी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी भी फैसले को चुनौती देने के लिए 90 दिनों का समय होता है.

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कहा कि इसी अवधि में बोर्ड के नुमाइंदे विशेष सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे. बता दें कि विशेष सीबीआई अदालत ने बाबरी विध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था.

इस मामले के आरोपियों में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी शामिल थे.

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