न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

15 नवंबर से कलमबंद हड़ताल करेंगे राज्य के सभी मुखिया, पंचायतों का काम होगा बाधित

508

Ranchi : अधिकारों को लेकर राज्य के पंचायत प्रतिनिधियों और सरकार के बीच टकराव की हालत बनी हुई है. अब पंचायत प्रतिनियों ने घोषणा की है कि 15 नवंबर, यानी राज्य स्थापना दिवस के दिन से राज्य की सभी पंचायतों के मुखिया कलमबंद हड़ताल करेंगे. मुखिया संघ और राज्य सरकार के बीच अविश्वास का माहौल आदिवासी विकास समिति व ग्राम विकास समिति गठन के समय से शुरू हो चुका था. मुखिया संघ की ओर से राज्य सरकार पर अरोप लगाया जा रहा है कि सरकार मुखियाओं के अधिकार छीन रही है. अब मुखिया संघ ने अपनी मांगों को लेकर 15 नवंबर से कलमबंद हड़ताल पर जाने की घोषणा की है. साथ ही, इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री पंचायती राज, राज्यपाल झारखंड, मुख्य सचिव झारखंड, राष्ट्रपति भवन सचिवालय, केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के मुख्य सचिव को भी पत्र भेजा गया है.

इसे भी पढ़ें- आजादी के 70 साल के बाद हमने चुकाया भगवान बिरसा का ऋण : रघुवर दास

मुखिया संघ ने पत्र में लिखा- सीएम ने कई बार मंच से मुखिया को अपमानित किया

पत्र में लिखा गया है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री द्वारा मंच से कई बार मुखिया को अपमानजनक संबोधन करके अपमानित किया गया है. इसमें “मुखिया जायेंगे जेल, मुखिया आउट ग्राम विकास समिति इन, मुखिया से लिया जायेगा हिसाब, मुखिया चोर हैं” जैसी बातें अखबारों में भी आती रही हैं. इससे मुखिया काफी व्यथित हैं. राज्य में पंचायतों को अधिकार नहीं दिया जा रहा है. झारखंड सरकार के पंचायती राज प्रभारी द्वारा आदेश संख्या 182/14 जुलाई 2017 को मुखिया की वित्तीय शक्ति जब्त करने का पत्र निर्गत हुआ है. जबकि पंचायत के हर कार्य में मुखिया द्वितीय हस्ताक्षर पदाधिकारी हैं. किसी भी कार्य में हुई गड़बड़ी के लिए सचिव को दोषी नहीं माना जाता, जबकि पंचायत में होनेवाले सभी कार्य में सचिव के हस्ताक्षर रहते हैं. इससे प्रतीत होता है कि वर्तमान सरकार सिर्फ और सिर्फ मुखिया पर ही कार्रवाई करना चाहती है.

इसे भी पढ़ें- उज्जवला योजना से मीलों दूर हैं आंगनबाड़ी केंद्र, चूल्हा फूंक तैयार हो रहा नौनिहालों का खाना

silk_park

मुखियाओं की परेशानी को कभी जानना नहीं चाहती सरकार

मुखिया संघ का कहना है कि झारखंड सरकार ने आज तक कभी भी मुखियाओं से नहीं पूछा कि पंचायत का कामकाज करने में कोई परेशानी है क्या. मुखिया संघ द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि पंचायतों को मनरेगा की 2.5 प्रतिशत कंटिंजेंसी राशि मिलनी चाहिए, जो नहीं मिल रही है. इस पर पदाधिकारी पर सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. वहीं 14वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने के लिए सभी पंचायत में कनीय अभियंता, सहायक अभियंता एवं कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराने थे, जो आज तक उपलब्ध नहीं कराये गये. इस पर दोषी पदाधिकारियों, विभाग पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. झारखंड सरकार के नियम के अनुसार पंचायतों को 14 विभाग एवं 29 विषय दिये गये हैं, लेकिन पदाधिकारी इसका अनुपालन नहीं कर रहे हैं. इस पर भी राज्य सरकार पदाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है. मनरेगा की योजना की मापी पुस्तिका बनती है. मजदूरों की मजदूरी खाते में जाये, इसके लिए मेट और रोजगार सेवक जिम्मेदार होते हैं. मजदूरों और मनरेगा में होनेवाली गड़बड़ी के लिए मुखिया को दोषी ठहराया जाता है, जबकि मापी पुस्तिका को भरनेवाले पदाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती. इससे प्रतीत होता है कि झारखंड सरकार राज्य में पंचायतों को सशक्त नहीं करना चाहती है.

इसे भी पढ़ें- सफाई व्यवस्था संभाल रही एस्सेल इंफ्रा से नगर विकास मंत्री की चलती है कमीशनखोरी :  सुबोधकांत सहाय

मुखिया संघ के पत्र में जिक्र है कि उपरोक्त समस्याओं को लेकर झारखंड सरकार से लेकर भारत सरकार को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं होने की वजह से राज्य के सभी मुखियाओं ने 15 नवंबर 2018 से कलमबंद हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: