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उज्जवला योजना से मीलों दूर हैं आंगनबाड़ी केंद्र, चूल्हा फूंक तैयार हो रहा नौनिहालों का खाना

धुएं से परेशान रहते हैं आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे

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Chandan Choudhary

Ranchi :  उज्जवला योजना के तहत सरकार प्रत्येक गरीब परिवार को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने का दावा कर रही है. तीन साल में देशभर में पांच करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था. सरकार के अनुसार, इस लक्ष्य को पूरा भी कर लिया गया. लेकिन आंगनबाड़ी हो या प्राथमिक विद्यालय केंद्र, यहां स्थिती यह है कि आज भी लकड़ी के चूल्हे पर ही बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा है. आंगनबाड़ी सेविका व सहियाओं को भी धुएं में ही दिन गुजारना पड़ रहा है. राजधानी के अंदर लगभग सभी आंगनबाड़ियों का हाल एक सा ही है. यहां गैस कनेक्शन नहीं दिया गया है. वर्षों से आगंनबाड़ी सेविका और सहिया लकड़ी और उपलों पर ही देश के भविष्य के लिए खाना तैयार करती हैं. इससे जहां एक ओर खाना पकने में समय ज्यादा लगता है, वहीं दूसरी ओर सेविका, सहिया के साथ-साथ बच्चों की सेहत भी धुएं से खराब हो रही है.

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चूल्हा फूंकते-फूंकते ही निकल जाता है वक्त

वार्ड संख्या 36 नगड़ी प्रखंड के बगीचा टोली में स्थित आंगनबाड़ी सेविका प्रितमा देवी ने बताया कि 1990 से आंगनबाड़ी केंद्र चला रही हैं और शुरू से ही लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बना रही हैं.  साथ ही बताया कि इस बारे में कई बार लिखने के बाद भी गैस चूल्हा उपलब्ध नहीं कराया गया. प्रितमा ने बताया कि वे लोग लकड़ी चुनकर लाते हैं, लेकिन कई बार लकड़ी के भींगे रहने की वजह से चूल्हा जलाने में काफी दिक्कत आती है. चूल्हा फूंकते-फूंकते ही दिन बीत जाता है तो बच्चों को शिक्षा क्या दे पायेंगे. बच्चों के सुबह का नाश्ता एवं दोपहर का खाना आंगनबाड़ी में ही तैयार किया जाता है. प्रितमा देवी ने कहा कि, केंद्र में 20 बच्चे हैं और सभी को समय पर खाना देना जरुरी है. सहायिका रनिया देवी ने बताया कि चूल्हा जलाने में दिक्कत होती है, धुआं से बच्चे भी परेशान होते हैं. सरकार योजना तो चलाती है, लेकिन इसका लाभ हम आंगनबाड़ी सेविकाओं को नहीं मिल पाता.

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एसबीएम की भी उड़ रही धज्जियां

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इस आंगनबाड़ी केंद्र में स्वच्छ भारत मिशन की भी बलि चढ़ा दी गयी है. समाज के अंतिम व्यक्ति तक शौचालय की सुविधा पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार को बगिचा टोली के इस आंगनबाड़ी केंद्र का मुआयना जरूर करना चाहिये. इस आंगनबाड़ी केंद्र में शौचालय की स्थिती बिल्कुल दयनीय है. साथ ही ना पानी की व्यवस्था और ना ही बिजली. सेविका, सहायिका एवं केंद्र के सभी बच्चे खुले में शौच के लिए जाते हैं. साथ ही पानी भी दूर से लाना पड़ता है और मांगकर ही काम चलाना पड़ता है.

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तुनिया देवी भी चूल्हे पर ही बनाती हैं खाना

पुंदाग के ही सरना टोली में एक अन्य आगंनबाड़ी केंद्र है, यहां की स्थिति और ज्यादा खराब है. केंद्र में 18 बच्चे हैं, जो शैक्षणिक गतिविधियां सीखने आते हैं. उन बच्चों के लिय़े भी खाना लकड़ी के चूल्हे पर ही तैयार किया जाता है. तुनिया देवी बताती हैं कि, सरकार ने उन्हें भवन भी उपलब्ध नहीं कराया है. तुनिया देवी अपने ही झोपड़ी के एक कोने में किसी तरह आंगनबाड़ी केंद्र चलाती हैं. तुनिया देवी ने बताया कि उज्जवला योजना में व्यक्तिगत गैस कनेक्शन देने के साथ-साथ सरकार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी गैस कनेक्शन देना चाहिए. ताकि बच्चों को समय पर और पौष्टिक खाना दे सकें. इसके अलावा हम सेविकाओं का भी सेहत ठीक रहेगा.

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