
Ranchi : नोवेल कोरोना (Covid-19) से रोकथाम में मदद के लिए झारखंड के मुखिया ने राज्य सरकार से सहयोग मांगा है. मुखिया संघ के अनुसार 14वें वित्त आयोग की राशि के छोटे हिस्से का उपयोग करने से पंचायतों में साफ़ सफाई के कामों को करने और कोरोना खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्विट करके इस दिशा में विचार किये जाने की अपील संघ की तरफ से की गयी है.
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आइसोलेशन वार्ड तैयार करने में होगा उपयोग
मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में कहा है कि समूचा देश अभी कोरोना से मुकाबले में जुटा है. देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है. ऐसे में पंचायत स्तर पर भी पहल किये जाने की जरुरत है.
पंचायतों में आइसोलेशन वार्ड बनाने, उसे सेनेटाईज करने, गांवों में मास्क वितरण और लोगों में जागरूकता पैदा करने में 14वें वित्त आयोग की राशि को खर्च करने की अनुमति मिले. इससे पंचायतों में कोरोना वायरस से संक्रमण और फैलाव को रोकने में मदद मिलेगी.
लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक व्यवस्था की जा सकेगी. पत्र की प्रति पंचायती राज विभाग के सचिव को भी भेजी गयी है.
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प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीटर पर कोरोना से मुकाबले को मांगे थे सुझाव
नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से बचाव और रोकथाम के बारे में लोगों से सुझाव मांगे थे. कहा था कि मुझे एहसास है कि आप सभी के बहुत सारे प्रश्न होंगे, कुछ चिंताएं भी होंगी और सुझाव भी होंगे. तो आइये, संवाद शुरू करते हैं.
मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो ने पीएम के इस ट्वीट पर लिखा है कि कोरोना वायरस को लेकर हम पंचायत के मुखिया सरकार के निर्देशों का अनुपालन गांवों में करा रहे हैं. इसको लेकर सेनेटाइजर, मास्क एवं हैण्डवाश की आवश्यकता है.
इसकी व्यवस्था पंचायतों में करायी जाये. मुखिया संघ के अनुसार अभी 14वें वित्त आयोग की राशि से जलमीनार और नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट लगाने और पेयजल तथा स्वछता कार्यक्रमों में ही राशि खर्च करने का प्रावधान है.
कोरोना की रोकथाम पंचायतों को अब तक नहीं मिले हैं 10 हजार रुपये
मुखिया संघ ने सीएम हेमंत सोरेन को ट्वीट कर यह भी जानकारी दी है कि कोरोना आपदा से राहत के मामले में सीएम के कहने के बावजूद पंचायतों को अब तक एक रुपये भी नहीं मिला है.
विभागीय स्तर से सरकार को गलत जानकारी दी गयी है कि सभी पंचायतों को इसके लिए 10 हजार रुपये दिए गए हैं. सरकार इस मामले में हकीकत जानकर कार्रवाई करे और तत्काल पंचायतों को यह सहयोग राशि मिले.
ताकि पंचायतों में भूख और दवाइयों के संकट का सामना कर रहे लोगों के लिए राहत अभियान चलाया जा सके.
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