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#Lockdown21: पैनिक न हो लोग,राजधानी में रसोई गैस की स्थिति सामान्य, प्रशासन सुरक्षा और मीडिया दें सहयोग: रवि भट्ट

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  • न्यूज विंग से बातचीत में झारखंड प्रदेश एलपीजी डीलर एसोसिएशन के महासचिव डॉ रवि भट्ट ने बतायी वस्तुस्थिति, कहा-लॉकडाउन से पैनिक होकर लोग कर रहे गैस का स्टॉक
  • निर्मल गैस एजेंसी के आरके.सिंह ने बताया, कर्मचारियों की कमी के कारण होम डिलीवरी में आ रही समस्याएं

Ranchi:  राज्य में लगे 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद लोगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या गैस सिलेंडर को लेकर देखी जा रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लगातार शिकायत मिल रही है कि रसोई गैस की कमी के कारण कई इलाकों में लोगों की भीड़ उमडी रही है.

इससे लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का सही तरीके पालन नहीं हो रहा है. इस बीच झारखंड प्रदेश एलपीजी डीलर एसोसिएशन के महासचिव डॉ रवि भट्ट ने न्यूज विंग से बातचीत में कहा है कि राजधानी में गैस सिलिंडर की कमी की बात पूरी तरह से गलत है.

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स्थिति पूरी तरह से सामान्य है. केवल लॉकडाउन के कारण लोग पैनिक हो गये है. उन्होंने प्रशासन और मीडिया से भी अपील कर कहा है कि इस पैनिक माहौल में वे अपना सहयोग दें. वहीं हरमू स्थित निर्मल गैस एजेंसी के आर.के.सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण होम डिलीवरी में समस्याएं आ रही है.

घरों में स्टॉक करने के कारण हो रही परेशानी

रवि भट्ट ने कहा कि जिला प्रशासन के होम डिलीवरी के निर्देश से पहले ही सभी गैस एजेंसियां रसोई गैस की होम डिलीवरी कर रही है. वैश्विक महामारी से पूरी व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है. लोग भी इस बात को समझ रहे है. लेकिन अचानक लगे इस लॉकडाउन के कारण लोग इसलिए पैनिक हो रहे है कि गैस सिलेंडरों की भारी हो सकती है.

लेकिन हकीकत यही है कि रसोई गैस की किसी तरह की कमी नहीं है. देर-सवेर सभी को गैस पहुंचाया जा रहा है. राजधानी के हर गैस वितरक एजेंसी को हर दिन दो से तीन ट्रक की आपूर्ति की जा रही है. दिक्कत यहां हो रही है कि लोग अब गैस की जमाखोरी करने लगे है. माह में दो गैस सिलिंडर लेने की जरूरत है. लेकिन लोग घर में पड़े सभी सिलिंडरों को भरा कर रखना चाह रहे है. उसी तरह उज्जवला योजना में माह में एक गैस देने की बात है, लेकिन इसमें भी लोग 2 से 3 लेना चाह रहे हैं.

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होम डिलीवरी के लिए पूरी तरह से कमिटेड, प्रशासन उपलब्ध कराएं सुरक्षा

उन्होंने कहा कि पैनिक होने का असर यह हो रहा है कि लोग रसोई गैस के लिए सुबह चार बजे से गोदामों में जमा हो रहे है. वहां जब गैस ट्रकों में लोड होता है, तो लोग उसे होम डिलीवरी के लिए जाने नहीं दे रहे है. अगर कोई गैस भरा ऑटो गोदाम से निकल भी जाता है, तो सड़क पर ही जबरन गैस उतार ले रहे है. यहां तक की कई बार लोगों द्वारा गैस डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों से मारपीट तक की नौबत देखने को मिली है.

इसके बावजूद प्रशासन का सहयोग गैस एजेंसियों को नहीं मिल रहा है. उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग कर कहा कि होम डिलीवरी के लिए वे पूरी तरह से कमिटेड है. आवश्यकता है कि गोदाम के पास और होम डिलीवरी के दौरान पुलिस की सुरक्षा भी मिले. इस दौरान मीडिया से भी उन्होंने सही वस्तुस्थिति लोगों को दिखाने की अपील भी की.

कर्मचारियों की कमी से नहीं हो पा रही होम डिलीवरी:  आरके.सिंह

निर्मल गैस एजेंसी के आरके. सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के कारण गैस डिलीवरी करने वाले कर्मचारी प्रशासन की सख्ती के कारण घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा पास जारी करने की बात की गयी है.

लेकिन लॉकडाउन को सरकार के द्वारा इतना पैनिक बना दिया गया है कि घऱ वाले डर से उनके कर्मचारियों को ही बाहर नहीं निकलने दे रहे है. उन्होंने कहा कि गैस की उपलब्धता पूरी तरह से है, लेकिन होम डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों के नहीं आ पाने के कारण यह स्थिति बनी है. हालांकि उन्होंने उम्मीद जतायी है कि अगले दो-तीन दिनों में स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी.

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