Opinion

मोदी सरकार करने जा रही है रेल टिकटों पर सब्सिडी छोड़ने की अपील

Girish Malviya

मोदी सरकार लोगों से रेल टिकटों पर सब्सिडी छोड़ने की अपील का विशाल अभियान छेड़ने जा रही है.… दरअसल रेलवे के प्राइवेटाईजेशन में सरकारी सब्सिडी सबसे बड़ी बाधा है…रेलवे का कहना है कि उसे यात्री परिवहन कारोबार (पैसेंजर ट्रांसपोर्ट बिजनेस) की लागत का महज 53% हिस्सा ही यात्रियों से हासिल हो पाता है…इसलिए मोदी सरकार रेल टिकटों पर उज्जवला योजना जैसी ही सब्सिडी छोड़ने की अपील जारी करने जा रही हैं…

कुछ दिन पहले ही खबर आयी थी कि, सरकार कुछ रूटों पर पैसेंजर ट्रेनों के संचालन की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों को देने पर गंभीरता से विचार कर रही है. रेलवे बोर्ड के एक दस्तावेज से पता चला है कि सरकार अगले 100 दिनों में कम भीड़भाड़ वाले और टूरिस्ट रूटों पर ट्रेन चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों की बोलियां मंगाने जा रही है….

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वैसे भी मोदी सरकार ने 350 से ज्यादा सीट जीतकर सत्ता में पुनर्वापसी की है, इसलिए उसे मालूम है कि उसके पास पर्याप्त जनाधार है, मोदी जी के भक्तों की संख्या में भी कोई कमी नहीं आयी है, इसलिए सभी मोदी भक्त रेल टिकटों पर सब्सिडी जरूर ही छोड़ देंगे, वैसे भी वो 200 रुपये लीटर पेट्रोल भरवाने को तैयार थे, तो क्या राष्ट्र के लिए सब्सिडी छोड़ने जितना मामूली काम नहीं करेंगे ?

समस्या तो हम जैसे तथाकथित देशद्रोहियों से है, हम भी यह सब्सिडी छोड़ देने पर जरूर विचार करेंगे. लेकिन हम चाहते हैं कि पहले देश के सांसद और विधायक लगभग फ्री के भाव मिल रही सारी जनसुविधाओं को छोड़ दें और उसके बाद यह अपील जारी करें !

2016 में हमे पता चला था कि संसद में बीते पांच सालों में इन सांसदों के सस्ते भेाजन पर 73 करोड़ 85 लाख 62 हजार 474 रुपये बतौर सब्सिडी दी गई है. आज भी लगभग 15 करोड़ रु प्रति साल की दर से सांसदों को सस्ते भोजन की सब्सिडी दी जा रही है, जिनकी मासिक पगार डेढ़ लाख रुपये से कम नहीं है. सरकार फिलहाल लगभग 2.7 लाख रुपये प्रतिमाह हर सांसद पर खर्च करती है.

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वैसे बात रेल टिकट पर सब्सिडी की चल रही है तो यह जान लेना भी समीचीन है कि सांसद की पत्नी/पति को रेल यात्रा के लिये फर्स्ट एसी का टिकट मुफ्त दिया जाता है. जिसमें वह साल में 8 बार यात्राएं कर सकते हैं. इसके अलावा ट्रेन में सांसद फर्स्ट क्लास एसी में अहस्तांतरणीय टिकट पर यात्रा कर सकता है. उन्हें एक विशेष पास दिया जाता है. पूर्व सांसदों को किसी एक सहयोगी के साथ ट्रेन में सेकेंड एसी में मुफ्त यात्रा की सुविधा है.

अकेले यात्रा पर प्रथम श्रेणी एसी की सुविधा है. अब हवाई यात्रा की सुविधाओं को भी जरा देख लीजिए…..आज भी सांसदों को हवाई यात्रा का 25 प्रतिशत ही देना पड़ता है. इस छूट के साथ एक सांसद सालभर में 34 हवाई यात्राएं कर सकता है. यह सुविधा पति/पत्नी दोनों के लिए है.

इसलिए हम जैसे देशद्रोही लोग चाहते हैं कि पहले सांसदों और विधायको को दी जाने वाली सारी सुविधाएं तुरन्त समाप्त की जाए और फिर रेलवे टिकट पर सब्सिडी छोड़ने जैसा वृहद अभियान चलाया जाए.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं,ये उनके निजी विचार हैं)

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