
Ranchi: ग्रामीण क्षेत्र में चल रही मनरेगा योजना को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रोजगार सृजन में एक मील का पत्थर बताया है. उन्होंने कहा है कि अगर यह योजना सही तरीके से संचालित होती है, तो ग्रामीण इलाकों में किसी भी तरह से रोजगार की कमी नहीं हो पाएगी. इसी योजना को लेकर राज्य सरकार काम कर रही है.
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उन्होंने कहा कि सरकार गठन के बाद कोरोना महामारी आई, इसके कारण योजना का आकलन विलंब से शुरू हो सका है. योजना से आज हरदिन राज्य के लगभग 6.50 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि योजना अंतर्गत करीब 10 लाख रोजगार सृजन किया जा सके. इसी लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए शुक्रवार को जिले के डीसी और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये गए है.
कमियां दूर करने पर बहुउद्देशीय योजना साबित होगी मनरेगा
सीएम ने कहा कि सरकार जानती है कि इस विपदा की घड़ी में मनरेगा योजना काफी उपयोगी साबित हुई है. इसे देख सरकार ने अधिकारियों को योजना से जुड़ी किसी भी बातों को अनदेखा नहीं करने का सख्त निर्देश दिया है. सीएम ने कहा कि उन्हें योजना में शामिल बिचौलियों के सामने की जानकारी मिली है. इससे योजना का लाभ सही लाभूकों को नहीं मिल पा रहा है. जिसे देख अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अधिकारी इसे दूर करें. हेमंत ने कहा कि भविष्य में योजना में कई कड़ियों को जोड़ा जाएगा. अगर योजना की कमियों को दूर कर लिया जाए, तो यह कहने में कोई परहेज नहीं कि यह एक बहुउद्देशीय योजना साबित होगी.
वस्त्र विक्रेता संघ ने सीएम को बतायी समस्या, दुकान खोलने की अपील
प्रोजेक्ट भवन में गुरुवार शाम को झारखंड थोक वस्त्र विक्रेता संघ के अपर बाजार का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम हेमंत से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को कपड़ा व्यापार को संचालन करने की अनुमति देने की मांग की. सदस्यों ने सीएम को बताया कि कपड़ा दुकान को नहीं खोलने के निर्देश से व्यवसायियों को काफी परेशानी हो रही है. इस दौरान मुक्ति संस्था के अध्यक्ष एवं झारखंड थोक वस्त्र विक्रेता संघ ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपये का चेक सौंपा.
बायोडायवर्सिटी सरकार की परिकल्पना की सीएम ने की बात
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन ने गुरुवार को डोरंडा स्थित वन भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान सीएम ने वन भवन परिसर में स्वयं पौधारोपण भी किया. सीएम ने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और जागरूक रहने की आवश्यकता बल दिया.
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उन्होंने कहा कि झारखंड प्रकृति के आंचल में बसा प्रदेश है. यहां के हरे-भरे जंगल, खेत, नदी-नाले एवं प्राकृतिक सौंदर्य इस प्रदेश की पहचान है. इन्हीं प्राकृतिक संपदाओं के कारण प्रदेश को झारखंड के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सबों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और जागरूक होने की आवश्यकता है. इस दौरान सोरेन ने बायोडायवर्सिटी सरकार की परिकल्पना की बात की. उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर इस परिकल्पना को मूर्त रूप देना है.




