
Ranchi : झारखंड राज्य राजस्व उप-निरीक्षक संघ के लोगों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम सांसद संजय सेठ को एक पत्र सौंपा.
पीएम मोदी गुरुवार को नये विधानसभा भवन के उद्घाटन को लेकर राजधानी आये थे. संघ के अध्य़क्ष सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 9 सूत्री को मांगों को लेकर सभी 24 जिलों के संघ कर्मी पिछले 5 सितम्बर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है.
संघ ने 2017 में सरकार से एक लिखित समझौता किया था जिसमें कुछ मांगों को मानी लिया गया था. शेष मांगें लंबित रह गयी थीं.
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तीसरी बार आंदोलन पर है संघ
अध्य़क्ष ने कहा कि 2017 में लंबित मांगों को लेकर सरकार और संघ में एक लिखित समझौता हुआ, लेकिन पूरी मांगों को नहीं माने जाने पर 2018 में संघ के लोग फिर से हड़ताल पर चले गये. सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया कि तीन माह के अंदर मांगें पूरी कर ली जायेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
8 माह बीत जाने के बाद भी सरकार के स्तर पर मांगों की पूर्ति नहीं की गयी. बाध्य होकर संघकर्मी तीसरी बार आंदोलन पर चले गये है. कर्मी गत 5 सितम्बर से आंदोलनरत हैं.
राजस्व से जुड़े कई काम हो चुके हैं ठप
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सुनील सिंह ने कहा कि बार-बार हड़ताल पर जाने के कारण सरकारी काम बाधित हो रहा है. पूरे झारखंड में राजस्व से जुड़े काम ठप्प हैं.
लाखों की संख्या में जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र, जमीन से संबंधित सभी जांच प्रतिवेदन लंबित हैं. इसके कारण राज्य के छात्रों को काफी परेशानी हो रही है, जिसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह से जिम्मेवार है.
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राजस्व संघ कर्मियों की मांगें
- राजस्व उपनिरीक्षकों का न्यूनतम ग्रेड पे 2400 रुपये देना, साथ ही 3 वर्षों के बाद ग्रेड पे 2800 रुपये करना.
- राजस्व प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना.
- जनगणना से समायोजित राजस्व उपनिरीक्षकों की सेवा की गणना भूतलक्षी के प्रभाव से किया जाये.
- अंचल निरीक्षक की सीधी भर्ती पर रोक लगाते हुए 50% पदों पर वरीयता एवं 50% सीमित परीक्षा लेकर प्रोन्नति देना.
- सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपनिरीक्षकों की कार्य अवधि 5 वर्ष निर्धारित करना.
- क्षेत्र भ्रमण के दौरान दोपहिया वाहन उपलब्ध कराना.
- राजस्व उपनिरीक्षकों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ देना.
- मुख्यमंत्री जनसंवाद से राजस्व संबंधी मामलों को अलग रखा जाना.
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