
Ranchi: रांची की मेयर आशा लकड़ा एक बार फिर चर्चा में है. चर्चा उनके उस आपत्तिजनक बयान को लेकर है, जो उन्होंने राज्य के एक आला आइएएस अधिकारी पर दिया है. मेयर का यह बयान नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे को लेकर है. एक आइएएस अधिकारी पर ऐसा बयान देकर मेयर ने भाषा की मर्यादा बिसार दी है. हालांकि हम मेयर के बयान को संस्थान में नहीं छाप सकते हैं, लेकिन मेयर ने सचिव के जिस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, उसे जरूर छाप रहे है.
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सचिव ने कहा था,”होल्डिंग टैक्स माफी का निगम का प्रस्ताव अव्यवहारिक”
दरअसल बुधवार को विभागीय सचिव बरियातू रोड के खास्ता हालत के निरीक्षण दौरे पर थे. इस दौरान सचिव से होल्डिंग टैक्स से राहत देने के प्रस्ताव पर सवाल पूछा गया था, तो उनका कहना था कि किसी का टैक्स भी माफ नहीं होगा. सब को टैक्स भरना होगा. विभागीय सचिव ने कहा था रांची नगर निगम की यह मांग पूरी तरह से अव्यवहारिक थी. नगर निगम के कुछ जनप्रतिनिधि खुद को दूसरों से अलग समझते हैं. उन्हें लगता है कि वह जो चाहेंगे सरकार वही करेगी. लेकिन यह जरूरी नहीं है.
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एक मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है. रांची नगर निगम
सचिव के बयान की निंदा कर प्रतिक्रिया देती हुए मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि एक आइएएस अफसर व सचिव के पद पर बैठे अधिकारी को इस प्रकार का बयान देना शोभा नहीं देता है. वे खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं. नगरपालिका अधिनियम के प्रावधान और जनप्रतिनिधियों के अधिकार का हनन कर रहे हैं. आम जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के बारे में नगर विकास विभाग के सचिव की इस टिप्पणी से सभी जनप्रतिनिधि आहत हुए हैं. जनप्रतिनिधियों ने आम जनता के हित को ध्यान में रख निगम परिषद के बैठक में होल्डिंग टैक्स पर छूट देने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था. परंतु हेमंत सरकार ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
संवैधानिक प्रावधानों के तहत नगर निगम के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान करना या नहीं करना उनके अधिकार क्षेत्र में है. परंतु विभागीय सचिव किसी दुर्भावना से ग्रसित होकर अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं. मेयर ने कहा कि विभागीय सचिव के बयान से यही आभास हो रहा है कि यदि दूसरे निकायों में कोई काम नहीं हो रहा है तो रांची नगर निगम भी कोई काम न करे. रांची नगर निगम राज्य के सभी निकायों के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है.
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